एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election): भारतीय लोकतंत्र के लिए वरदान या संघीय ढांचे के लिए चुनौती?
लेखक: आकाश दीप | युगबोध 2024 — जब एक साल में 4 बड़े राज्यों के चुनाव हुए और आचार संहिता ने सरकार को 8 महीने रोके रखा 2024। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ उसी साल आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड में भी विधानसभा चुनाव हुए। इन सबको मिलाकर आचार संहिता लगभग 8 महीने किसी न किसी रूप में किसी न किसी राज्य में लागू रही। उन महीनों में केंद्र और राज्य सरकारें नई योजनाएँ announce नहीं कर सकती थीं, नए contracts नहीं दे सकती थीं, बड़े transfers नहीं कर सकती थीं। यह situation हर साल कम-ज़्यादा दोहराई जाती है। भारत इतना बड़ा देश है कि शायद ही कोई calendar year होता है जब कोई बड़ा चुनाव न हो। यही वह background है जिसमें "एक देश, एक चुनाव" का विचार उठता है — और बार-बार विवाद का केंद्र बनता है। यह विचार कहता है — लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। क्या यह भारतीय लोकतंत्र के लिए वरदान है, या हमारे संघीय ढाँचे के लिए एक गंभीर चुनौती? आज इसका पूरा, संतुलित और तथ्य-आधारित विश्लेषण। पहले समझें — यह विचार नया नहीं है ...