संसद की स्थायी समितियाँ क्या हैं? जहाँ कैमरे नहीं, लेकिन देश की नीतियाँ बनती हैं | पूरा विश्लेषण
लेखक: आकाश दीप | युगबोध संसद का वह कमरा जहाँ कैमरे नहीं होते लेकिन देश की नीतियाँ बनती हैं लोकसभा का Floor। 543 सांसद। TV cameras। बहस, हंगामा, नारे। यही तस्वीर हम हर शाम news में देखते हैं। लेकिन भारतीय संसद का असली काम यहाँ नहीं होता। संसद भवन के एक दूसरे हिस्से में एक छोटे से कमरे में 31 सांसद बैठे हैं। कोई camera नहीं। कोई नारा नहीं। सामने है एक 500 पेज की ministry report, एक बजट की detailed demand, या एक bill जिसे अगले महीने पास होना है। एक सरकारी अधिकारी जवाब दे रहा है। एक विशेषज्ञ evidence दे रहा है। Opposition का सांसद एक तीखा सवाल पूछता है और ruling party का सांसद उसे seriously note करता है। यह हैं संसदीय स्थायी समितियाँ (Parliamentary Standing Committees) वह जगह जहाँ भारत का असली विधायी काम होता है। जहाँ Floor पर party lines होती हैं यहाँ काफी हद तक consensus होता है। जहाँ Floor पर भाषण होते हैं यहाँ scrutiny होती है। जहाँ Floor पर politics होती है यहाँ governance होती है। Sir Ivor Jennings ने parliamentary committees को "संसद की आँखें और कान" कहा था। ...