भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ क्या हैं? चुनाव, वीटो, क्षमादान और संविधान में भूमिका का पूरा सच
लेखक: आकाश दीप | युगबोध 1986 — जब राष्ट्रपति जैल सिंह ने एक Bill को "जेब में रख लिया" और Parliament कुछ नहीं कर सकी 1986। प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार। Parliament ने एक Bill पास किया — Indian Post Office (Amendment) Bill। इसमें सरकार को यह अधिकार मिलना था कि वह किसी भी पत्र या पार्सल को बिना warrant के intercept कर सके। Bill पास हुआ। हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के पास भेजा गया। जैल सिंह ने Bill को न sign किया, न return किया — बस रख लिया। संविधान में राष्ट्रपति के लिए Bill पर कोई time limit नहीं है। यह "Pocket Veto" था — जिसका इस्तेमाल पहली और अब तक शायद आखिरी बार हुआ। Bill न Law बना, न formally reject हुआ। सरकार कुछ नहीं कर सकी। यह एक घटना नहीं — यह एक सबक है। जिस office को लोग "rubber stamp" कहते हैं — उसने बिना एक शब्द बोले एक powerful Prime Minister को रोक दिया। भारत के राष्ट्रपति का पद — दिखने में ceremonial, लेकिन संविधान की गहराई में कुछ ऐसी शक्तियाँ छुपी हैं जो सही moment पर निर्णायक हो सकती हैं। आज इसका पूरा सच — र...