असम में फिर लौटा ‘मामा’ मॉडल: कांग्रेस से BJP तक हिमंत बिस्वा सरमा का सफर और आखिर कैसे बने पूर्वोत्तर की राजनीति के सबसे ताकतवर चेहरे?

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

4 मई 2026 को असम ने तीसरी बार कहा — हाँ, 'मामा'

4 मई 2026। Election Commission of India के official results आए। BJP अकेले 82 सीटें। AGP 10, BPF 10 — NDA कुल 102 सीटें। Congress सिकुड़कर 19 पर आ गई।

126 में से 102। जिस पार्टी की 2011 में असम में 5 सीटें थीं — वह आज 102 पर है। और जो इस पूरे बदलाव का architect है — वह है हिमंत बिस्वा सरमा।

यह महज चुनावी जीत नहीं है। यह उस 'मामा मॉडल' की तीसरी बार validation है जिसे हिमंत ने साल-दर-साल असम की जमीन पर खड़ा किया।

2011 से 2026 तक: जब एक आदमी ने पूरा समीकरण बदल दिया

सालBJPCongressNDA कुल
2011578
20166026~86
2021602975
20268219102

Congress 78 से 19 पर आ गई। BJP 5 से 82 पर। यह numbers किसी भी analysis से ज्यादा कहानी बता देते हैं।

और दिलचस्प बात — Congress की तरफ से Gaurav Gogoi ने Jorhat से चुनाव लड़ा। वही Gaurav Gogoi जिनके पिता तरुण गोगोई की वजह से हिमंत को एक वक्त Congress में जगह नहीं मिली थी। इतिहास की irony देखिए।

कहानी शुरू होती है एक पुरानी नाराजगी से

2001 से 2015 तक हिमंत तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रहे। Health, Education, Finance। जमीनी स्तर पर उनकी पहचान बनती गई। National Health Mission के तहत ग्रामीण असम में Primary Health Centers बढ़े — इसका श्रेय हिमंत को मिला।

लेकिन पार्टी के भीतर एक चीज साफ दिख रही थी। Gaurav Gogoi को आगे बढ़ाया जा रहा था। हिमंत के लिए रास्ता बंद हो रहा था।

Lokniti-CSDS के अनुसार 2011 में Congress का vote share 39.4 प्रतिशत था। 2016 में यह 31 प्रतिशत रह गया। सिर्फ इसलिए नहीं कि BJP मजबूत हुई — बल्कि इसलिए कि Congress ने अपना सबसे बड़ा election manager खो दिया था।

2015 का वह फैसला जिसने North-East का नक्शा बदला

जब हिमंत ने BJP join की, तो दिल्ली में शायद किसी ने इसे routine dalbadal माना होगा। असम में हर कोई जानता था — यह कुछ और है।

उनके पास केवल एक MLA की सीट नहीं थी। 126 विधानसभा क्षेत्रों में grassroots network था। District-level leaders उनके साथ थे। Local caste-community equations उन्हें पता थे।

2016 में BJP ने पहली बार असम में सरकार बनाई — 60 सीटें। Sarvabanda Sonowal CM बने, लेकिन जिसने यह architecture तैयार किया वह हिमंत थे।

North-East में BJP का झंडा — यह सिर्फ ideology नहीं थी

2016 से 2023 के बीच BJP या उसके सहयोगियों ने North-East के 8 में से 7 राज्यों में सरकार बनाई। BJP अध्यक्ष JP Nadda ने 2021 में publicly कहा था — हिमंत North-East expansion के "driving force" हैं।

यह compliment नहीं था। यह fact था।

हिमंत ने Bodoland People's Front और Asom Gana Parishad के साथ alliance किया। Meghalaya, Manipur, Tripura में भी उनकी strategic footprint थी। BJP को वे "दिल्ली की पार्टी" से "North-East compatible party" बनाने में मदद की।

'मामा' — यह नाम PR team ने नहीं, जनता ने दिया

COVID के दौरान जब बाकी नेता statements दे रहे थे, हिमंत hospitals में दिख रहे थे। Ministry of Health के आँकड़ों के अनुसार असम ने 2021 के अंत तक अपनी adult population का 70 प्रतिशत से अधिक vaccination complete किया — North-East में comparatively बेहतर।

IAMAI के अनुसार उनके X (Twitter) पर 70 लाख से अधिक followers हैं। वे खुद जवाब देते हैं, खुद react करते हैं। यह accessible leadership की image है। और 2026 के नतीजों ने दिखाया — असम की जनता को यही चाहिए था।

2021 और 2026: दोनों बार जीत, लेकिन 2026 ज्यादा बड़ी

2021 में BJP+ ने 75 सीटें जीती थीं। 2026 में 102। यानी 27 सीटों का इजाफा। Congress 29 से 19 पर आ गई।

यह बढ़त इसलिए और meaningful है क्योंकि इस बार opposition ने Asom Sonmilito Morcha बनाकर unified challenge देने की कोशिश की थी। November 2025 में Congress समेत 8 पार्टियों ने एक साथ alliance किया था। फिर भी नतीजा — BJP अकेले 82।

यह हिमंत के 'मामा मॉडल' की सबसे बड़ी electoral validation थी।

Infrastructure और Identity — दोनों एक साथ

Ministry of Road Transport के अनुसार असम में 2016-2024 के बीच National Highways की लंबाई लगभग दोगुनी हुई। Bogibeel Bridge — एशिया का सबसे लंबा Rail-Road Bridge — उनके कार्यकाल में पूरा हुआ। असम में Tea Garden workers की welfare schemes — 7 लाख workers, बड़ा voter base।

लेकिन development के साथ-साथ identity politics भी उतनी ही aggressive रही। NRC process में 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम exclude हुए। Migration का मुद्दा, Assamese अस्मिता — यह सब उनके core narrative का हिस्सा रहा।

Supporters कहते हैं — यही जरूरी था। Critics कहते हैं — यह polarization है। Election results ने supporters को सही ठहराया।

कांग्रेस की वह गलती जो 15 साल बाद भी दिख रही है

2011: Congress 78, BJP 5। 2026: BJP 82, Congress 19।

Congress ने 2015 में एक नेता नहीं खोया था — उसने North-East का सबसे बड़ा political architect खो दिया था। और उसकी कीमत वह आज भी चुका रही है।

Gaurav Gogoi जिनके लिए Himant को जगह नहीं मिली थी — वे खुद Jorhat से चुनाव लड़े। Party की हालत देखें तो यह इतिहास की एक कड़वी irony है।

आगे क्या? तीसरी बार CM — असली परीक्षा अब

2026 की जीत impressive है। लेकिन राजनीति में सत्ता हासिल करना और उसे टिकाए रखना — दोनों अलग खेल हैं।

तीन बार लगातार जीत के बाद anti-incumbency का खतरा बढ़ता है। Development के वादे पूरे करने का दबाव और बड़ा होगा। Identity politics की आग को control में रखना और मुश्किल होगा।

अभी तो 'मामा' की popularity रिकॉर्ड high पर है — 85.96 प्रतिशत voter turnout इसका सबूत है। लेकिन जनता का भरोसा बनाए रखना — यही सबसे मुश्किल काम है।

आप क्या सोचते हैं — क्या हिमंत बिस्वा सरमा असम को सच में बदल रहे हैं? या यह electoral success governance success से अलग है? नीचे comment में जरूर बताएं।

स्रोत / Sources:

1. Election Commission of India — Assam Assembly Final Results 2026 (results.eci.gov.in)
2. Election Commission of India — Assam Assembly Results 2011, 2016, 2021
3. Lokniti-CSDS — North-East Political Study
4. Ministry of Road Transport & Highways — North-East Connectivity Data
5. Ministry of Health and Family Welfare — COVID Vaccination State Data
6. IAMAI — Digital India Report 2024

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