पेट्रोल महँगा हुआ तो कांग्रेस को मिला हथियार — लेकिन क्या कांग्रेस के 10 साल का रिकॉर्ड साफ है?
लेखक: आकाश दीप | युगबोध
पेट्रोल महँगा हुआ तो कांग्रेस को मिला हथियार — लेकिन क्या कांग्रेस के 10 साल का रिकॉर्ड साफ है?
15 मई 2026 को जैसे ही पेट्रोल ₹3 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महँगा हुआ, भारतीय राजनीति में एक पुरानी बहस फिर से जीवित हो गई। विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू किया, सत्तापक्ष ने पलटवार किया, और social media पर दोनों तरफ से आँकड़ों की बाढ़ आ गई।
लेकिन सच्चाई यह है कि इस बहस में दोनों पक्ष अपने-अपने चुने हुए आँकड़े पेश करते हैं। आज हम इस विषय को निष्पक्ष रूप से देखने की कोशिश करेंगे — UPA के 10 साल बनाम NDA के 11-12 साल, excise duty की असली कहानी, और दुनिया के दूसरे देशों में petrol की कीमतें।
पहले समझें: पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में petrol की कीमत तीन बड़े हिस्सों से बनती है। पहला — crude oil की international कीमत जो dollar में तय होती है। दूसरा — rupee-dollar exchange rate। तीसरा और सबसे विवादित — केंद्र सरकार की excise duty और राज्य सरकार का VAT।
आज दिल्ली में petrol की कीमत लगभग ₹103 प्रति लीटर है। इसमें से base price लगभग ₹55-58 है, केंद्र की excise duty लगभग ₹19-20 और दिल्ली का VAT लगभग ₹15-16। यानी pump price का लगभग 55-60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों का tax है।
यही वह बिंदु है जहाँ से राजनीतिक विवाद शुरू होता है।
UPA के 10 साल (2004-2014): कांग्रेस का रिकॉर्ड क्या है?
| साल | पेट्रोल (₹/लीटर) | Crude Oil ($/barrel) |
|---|---|---|
| 2004 | ₹33-34 | $41 |
| 2006 | ₹47 | $66 |
| 2008 | ₹50-55 | $99 |
| 2010 | ₹56 | $79 |
| 2012 | ₹69 | $94 |
| 2014 (मई) | ₹71-73 | $107 |
UPA के 10 साल में petrol ₹34 से ₹73 हो गया — यानी लगभग 115 प्रतिशत की बढ़ोतरी। लेकिन इस दौर में crude oil भी $41 से $107 हो गया था — यानी crude में 161 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
UPA सरकार का तर्क था कि OMCs को भारी under-recoveries हो रही थीं। तत्कालीन Petroleum Minister Murli Deora ने कहा था कि oil PSUs को ₹74,300 करोड़ की under-recovery हो रही थी और कीमतें न बढ़ाना संभव नहीं था।
हालाँकि UPA सरकार ने एक काम किया जिसकी आज भी तारीफ होती है — 2007-08 के global financial crisis के दौरान जब crude $99/barrel था, तब भी उन्होंने petrol की कीमतें स्थिर रखीं ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े। इसके लिए Oil Bonds जारी किए गए।
NDA के 11-12 साल (2014-2026): मोदी सरकार का रिकॉर्ड क्या है?
| साल | पेट्रोल (₹/लीटर) | Crude Oil ($/barrel) |
|---|---|---|
| 2014 (जून) | ₹71-73 | $107 |
| 2016 | ₹62-65 | $43 |
| 2018 | ₹78-80 | $65 |
| 2020 (COVID) | ₹72-75 | $39 |
| 2022 | ₹96-105 | $94 |
| 2024 | ₹94-100 | $76 |
| 2026 (मई) | ₹103+ | $105 |
NDA के 11-12 साल में petrol ₹73 से ₹103 हो गया — यानी लगभग 40-41 प्रतिशत की बढ़ोतरी। Crude oil इस दौरान औसतन $71 प्रति बैरल रहा — जो UPA के दौर के $76.5 औसत से कम है।
यही विपक्ष का सबसे बड़ा तर्क है। Crude सस्ता था लेकिन petrol महँगा रहा — क्योंकि excise duty बढ़ा दी गई।
Excise Duty की असली कहानी — यहीं है असली विवाद
| साल | Petrol पर Excise Duty | Diesel पर Excise Duty |
|---|---|---|
| 2014 (NDA शुरू) | ₹9.48/लीटर | ₹3.56/लीटर |
| 2016 (peak) | ₹21.48/लीटर | ₹17.33/लीटर |
| 2020 (COVID) | ₹32.90/लीटर | ₹31.80/लीटर |
| 2022 (कटौती बाद) | ₹19.90/लीटर | ₹15.80/लीटर |
| 2026 (अभी) | ~₹19-20/लीटर | ~₹15/लीटर |
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 में केंद्र सरकार ने petrol-diesel excise duty से ₹74,158 करोड़ कमाए। 2020-21 में यह बढ़कर ₹3,71,908 करोड़ हो गया — यानी 6 साल में 5 गुना वृद्धि।
सरकार का जवाब है कि यह राजस्व infrastructure, welfare schemes और UPA के Oil Bonds चुकाने में लगाया गया। लेकिन विपक्ष का सवाल है — जब 2015-16 में crude $43/barrel था, तब petrol सस्ता क्यों नहीं हुआ? उस फायदे का एक पैसा भी consumer तक क्यों नहीं पहुँचा?
Oil Bonds विवाद: BJP का UPA पर और UPA का BJP पर आरोप
BJP का तर्क है कि UPA सरकार ने petrol-diesel सस्ता रखने के लिए Oil Bonds जारी किए जिनका बोझ मोदी सरकार को उठाना पड़ा।
Congress का जवाब है कि Oil Bonds की शुरुआत असल में BJP की Vajpayee सरकार ने 2002 में की थी। और UPA ने 2007-08 में जो Oil Bonds जारी किए, उनकी कुल राशि लगभग ₹1.3 लाख करोड़ थी — जबकि Modi सरकार ने excise duty से केवल 6 सालों में ₹3.71 लाख करोड़ से अधिक कमाए। यानी Oil Bonds का बोझ excise duty collections का एक छोटा हिस्सा भर है।
दोनों तरफ के तर्कों में आंशिक सच्चाई है। लेकिन एक बात निर्विवाद है — जब crude सस्ता था, तब सरकार ने excise duty बढ़ाकर उस फायदे को consumer तक पहुँचने नहीं दिया।
दुनिया में पेट्रोल की कीमतें: भारत कहाँ खड़ा है?
| देश | पेट्रोल ($/लीटर) — 2026 | भारतीय रुपये में |
|---|---|---|
| ईरान | $0.05 | ~₹4 |
| वेनेजुएला | $0.10 | ~₹8 |
| सऊदी अरब | $0.62 | ~₹52 |
| UAE | $0.78 | ~₹65 |
| पाकिस्तान | $0.91-1.15 | ~₹76-96 |
| भारत | $1.11-1.23 | ~₹93-103 |
| USA | $0.95 | ~₹79 |
| UK | $1.82-2.27 | ~₹152-190 |
| नॉर्वे | $1.90 | ~₹158 |
स्रोत: GlobalPetrolPrices.com, May 2026 | PakFuel.today, March 2026
यहाँ एक महत्वपूर्ण तुलना है। USA में petrol भारत से सस्ता है — $0.95/लीटर यानी लगभग ₹79। जबकि अमेरिका एक विकसित देश है जहाँ per capita income भारत से 30-40 गुना ज्यादा है।
इसका मतलब यह नहीं कि भारत में petrol आज भी बहुत महँगा है। UK और Norway में petrol भारत से बहुत महँगा है। लेकिन वहाँ per capita income भी बहुत ज्यादा है और public transport excellent है।
असली सवाल purchasing power का है। एक अमेरिकी जो $65,000 सालाना कमाता है उसके लिए $0.95/लीटर petrol का मतलब वह नहीं है जो ₹15,000 महीना कमाने वाले भारतीय के लिए ₹103/लीटर का मतलब है।
उस समय और आज: एक और दिलचस्प तुलना
| तुलना | 16 मई 2014 | 15 मई 2026 |
|---|---|---|
| Crude Oil ($/barrel) | $107.49 | $105+ |
| दिल्ली Petrol | ₹71.51 | ~₹103 |
| दिल्ली Diesel | ₹57.28 | ₹90.67 |
| Excise Duty (Petrol) | ₹9.48/लीटर | ~₹19-20/लीटर |
यह तुलना विपक्ष का सबसे powerful argument है। Crude oil की कीमत 2014 जैसी ही है — $107 से $105। लेकिन petrol ₹71 से ₹103 हो गया। यह फर्क excise duty में वृद्धि की वजह से है।
2014 में excise duty ₹9.48 थी, अब ₹19-20 है। यानी लगभग दोगुनी। ₹31 के इस अंतर का बड़ा हिस्सा tax में वृद्धि की वजह से है।
विपक्ष को मसाला कैसे मिला — और BJP का जवाब क्या है?
Congress और विपक्षी दल तीन बड़े points पर सरकार को घेर रहे हैं।
विपक्ष का पहला तर्क: Crude oil का price 2024 में औसतन $76 था। इतने सस्ते crude के बावजूद petrol ₹94-100 रहा। जब crude $39 था (COVID 2020) तब भी petrol ₹72-75 था। Crude सस्ता हो तो भी consumer को फायदा नहीं, महँगा हो तो बोझ तुरंत।
विपक्ष का दूसरा तर्क: 6 सालों में excise duty से ₹3.71 लाख करोड़ कमाए गए। Oil Bonds की कुल liability ₹1.3 लाख करोड़ थी। तो Oil Bonds का बहाना सही नहीं है।
विपक्ष का तीसरा तर्क: BJP ने 2012-13 में UPA के खिलाफ "price rise" पर बड़े आंदोलन किए थे। तब petrol ₹70-73 था और crude $94-97 था। आज crude उतना ही है, petrol ₹103 है — और BJP चुप है।
BJP का जवाब: UPA ने 10 साल में petrol ₹29 से ₹73 किया — यानी 150 प्रतिशत बढ़ा। NDA ने 12 साल में ₹73 से ₹103 किया — यानी 40 प्रतिशत। Percentage में NDA का रिकॉर्ड बेहतर है।
BJP का दूसरा तर्क: Excise duty से जो revenue आया वह highways, PMGSY, PM-KISAN, free ration जैसी schemes में गया। Welfare spending record high रही।
BJP का तीसरा तर्क: जिन राज्यों में petrol सबसे महँगा है — Telangana ₹109, Kerala ₹106, West Bengal ₹105 — वे सब opposition-ruled states हैं जहाँ VAT बहुत ज्यादा है।
निष्पक्ष विश्लेषण: कौन कितना जिम्मेदार है?
इस पूरे विवाद में सच्चाई दोनों पक्षों के बीच कहीं है।
UPA सरकार के लिए सच: उनके दौर में crude oil genuinely बहुत महँगा था। $41 से $107 तक। इस दौर में petrol महँगा होना partly unavoidable था। 2007-08 में उन्होंने Oil Bonds जारी करके consumer को राहत दी — यह genuine positive था।
UPA सरकार के खिलाफ सच: उन्होंने भी excise duty का इस्तेमाल revenue के लिए किया। Petrol deregulation के बाद भी कीमतें political considerations से प्रभावित होती रहीं।
Modi सरकार के लिए सच: Percentage में petrol कम बढ़ा। Infrastructure spending genuinely बढ़ी। कुछ मौकों पर — 2021 और 2022 में — excise duty घटाकर राहत भी दी।
Modi सरकार के खिलाफ सच: जब crude $39-43/barrel था तब excise duty रिकॉर्ड high थी। उस सस्ते crude का फायदा consumer तक नहीं पहुँचा। Excise duty 2014 के मुकाबले आज भी दोगुनी है।
निष्कर्ष: पेट्रोल की राजनीति कभी खत्म नहीं होती
भारत में petrol की कीमत केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है। यह एक राजनीतिक barometer है। जब भी petrol महँगा होता है, सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने आँकड़े निकाल लेते हैं।
लेकिन एक बात दोनों दलों में common है — जब सत्ता में होते हैं तो excise duty से revenue कमाते हैं, जब विपक्ष में होते हैं तो उसी tax को "जनता पर बोझ" बताते हैं।
असली सुधार तब होगा जब petrol-diesel को GST के दायरे में लाया जाए — जिसकी माँग economists लंबे समय से कर रहे हैं। GST council में एकसमान tax rate होने से राज्यों में कीमतों का अंतर खत्म होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों को revenue छोड़नी होगी — और यही वह कदम है जो कोई भी सरकार अभी तक उठाने को तैयार नहीं हुई।
आप क्या सोचते हैं — क्या UPA या NDA में से किसी का रिकॉर्ड साफ है? या दोनों ने petrol को राजनीतिक हथियार बनाया? नीचे comment में अपनी राय जरूर बताएं।
स्रोत / Sources:
1. Business Standard — "Central govt's tax collection on petrol, diesel jumps 300% in six years", March 2021
2. The Print — "40% rise vs 77% jump: Petrol price hiked under Modi govt, UPA reasons differ", July 2021
3. GlobalPetrolPrices.com — International Petrol Price Comparison, May 2026
4. Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) — Crude Oil and Retail Price History
5. ClearTax — "Petrol Price In India: Yearly History From 2004 To 2026"
6. Indian National Congress — "The Oil Bonds Fairy Tale" (Fact Check)
7. Ministry of Finance — Excise Duty Data (via Lok Sabha reply, Anurag Thakur, 2021)

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