Est. 2025 · लेखक: आकाश दीप

राजनीति, इतिहास, रक्षा और अर्थव्यवस्था

हर बड़े मुद्दे की पूरी कहानी — तथ्यों के साथ, संदर्भ के साथ, बिना पक्षपात के।

एक देश, दो भारत: क्यों कुछ राज्य अमीर होते गए और कुछ आज भी गरीब हैं?

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

भारत के अमीर और गरीब राज्यों के बीच बढ़ती आर्थिक असमानता को दर्शाता चित्र।

वह सवाल जो हर भारतीय के मन में है

तमिलनाडु का एक आम नागरिक जो देश के सबसे अधिक tax देने वाले राज्यों में से एक में रहता है जब दिल्ली जाता है और देखता है कि उसके राज्य को जितना tax वह देता है उसकी तुलना में बहुत कम वापस मिलता है, तो वह एक सवाल पूछता है। बिहार का एक नागरिक जो तीन पीढ़ियों से गरीबी में है  जब देखता है कि उसके राज्य को Central funds तो मिलते हैं, लेकिन फिर भी विकास नहीं आता, तो वह एक अलग सवाल पूछता है।

दोनों के सवाल अलग हैं, लेकिन दोनों की जड़ एक ही है भारत की राज्य-स्तरीय आर्थिक असमानता।

एक देश। एक संविधान। एक tax system (GST के बाद)। लेकिन 28 राज्यों की आर्थिक तस्वीर इतनी अलग-अलग है कि Maharashtra और Goa को अगर एक देश मान लें, तो वह Malaysia से अमीर होगा। और अगर Bihar और UP को एक देश मान लें, तो वह Ethiopia और Yemen जैसे गरीब देशों के करीब होगा। यह खाई 75 साल में कैसे बनी? क्या यह केवल भूगोल है? या इसमें राजनीति, नीति और इतिहास भी है? यही इस लेख का विषय है।

भारत का आर्थिक नक्शा 2024-25: पूरी सूची एक जगह

सबसे पहले latest data देखते हैं। FY 2024-25 में भारत के राज्यों का GSDP (Gross State Domestic Product) इस प्रकार है:

रैंक राज्य GSDP FY25 (₹ लाख करोड़) GDP में हिस्सा % क्षेत्र
1 महाराष्ट्र 42.67 13.46% पश्चिम
2 तमिलनाडु 31.55 8.93% दक्षिण
3 उत्तर प्रदेश 24.99 8.77% उत्तर
4 कर्नाटक 28.09 8.49% दक्षिण
5 गुजरात 27.90 8.05% पश्चिम
6 पश्चिम बंगाल 16.50 4.80% पूर्व
7 राजस्थान 15.50 4.50% उत्तर-पश्चिम
8 तेलंगाना 14.80 4.20% दक्षिण
9 आंध्र प्रदेश 13.40 3.80% दक्षिण
10 मध्य प्रदेश 13.20 3.70% मध्य
11 केरल 12.50 3.80% दक्षिण
12 हरियाणा 11.50 3.30% उत्तर
13 दिल्ली (UT) 11.20 3.10% उत्तर
14 बिहार 8.50 2.40% पूर्व
15 पंजाब 7.80 2.20% उत्तर
16 ओडिशा 7.50 2.10% पूर्व
17 असम 5.20 1.50% पूर्वोत्तर
18 झारखंड 4.80 1.40% पूर्व
19 छत्तीसगढ़ 4.60 1.30% मध्य
20 उत्तराखंड 3.70 1.10% उत्तर

चौंकाने वाला तथ्य: Top 5 states — Maharashtra, Tamil Nadu, Uttar Pradesh, Karnataka और Gujarat — मिलकर India के GDP का 47.71% share करते हैं। और पाँचों दक्षिण भारतीय राज्य मिलकर लगभग 31% contribute करते हैं — जबकि उनकी आबादी देश की कुल जनसंख्या का केवल 20% है।

प्रति व्यक्ति आय: यहाँ असली खाई दिखती है

GSDP के आँकड़े कभी-कभी भ्रामक हो सकते हैं — क्योंकि बड़ी आबादी वाला राज्य कुल GSDP में ऊपर दिख सकता है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बहुत पीछे हो। असली खाई दिखती है Per Capita Income में।

राज्य Per Capita Income (₹/वर्ष) राष्ट्रीय औसत से तुलना Tax/Taxpayer (₹)
गोवा ~5.5 लाख 3.2x राष्ट्रीय औसत
दिल्ली ~4.6 लाख सर्वोच्च among states ₹2,51,520 (1st)
हरियाणा ~3.2 लाख 1.9x राष्ट्रीय औसत
महाराष्ट्र ~2.8 लाख 1.65x राष्ट्रीय औसत ₹1,18,370 (2nd)
तमिलनाडु ~2.6 लाख 1.55x राष्ट्रीय औसत
कर्नाटक ~2.5 लाख 1.5x राष्ट्रीय औसत ₹68,150 (3rd)
गुजरात ~2.4 लाख (राष्ट्रीय औसत का 160.7%) 1.42x राष्ट्रीय औसत
राष्ट्रीय औसत ~1.69 लाख
उत्तर प्रदेश ~80,000 राष्ट्रीय औसत का 47% ₹4,006 (last)
बिहार ~54,000 राष्ट्रीय औसत का 32% बेहद कम

यानी दिल्ली का एक taxpayer जितना tax देता है, उतना UP के 63 taxpayers मिलकर देते हैं। यह सिर्फ अमीरी-गरीबी की बात नहीं — यह systematic inequality है जो दशकों से चली आ रही है।

केंद्रीय tax में योगदान बनाम वापसी: "दो" और "पाओ" का असमान खेल

यहाँ भारत के fiscal federalism का सबसे संवेदनशील मुद्दा आता है। क्या जो राज्य अधिक tax देते हैं, उन्हें केंद्र से अधिक वापस मिलता है? जवाब है — नहीं। और यही वह तनाव है जो आज उत्तर-दक्षिण बहस को जन्म दे रहा है।

राज्य Central Tax में अनुमानित योगदान 15वें FC में share (2021-26) 16वें FC में share (2026-31) लाभ/हानि
उत्तर प्रदेश कम (per capita low) 17.94% 17.62% सबसे अधिक पाने वाला — हल्की कमी
बिहार बहुत कम 10.06% 9.95% अधिक पाने वाला — हल्की कमी
तमिलनाडु देश में 2nd (GSDP + GST) 4.08% 4.10% मामूली वृद्धि — पर तुलना में कम
कर्नाटक बहुत अधिक (Bengaluru IT hub) 3.65% 4.13% बढ़ोतरी — पर अभी भी कम
केरल अधिक (per capita high) 1.93% 2.38% बढ़ोतरी — 16th FC में राहत
आंध्र प्रदेश मध्यम 4.05% 4.22% बढ़ोतरी
5 दक्षिण राज्य (कुल) ~31% GDP में 15.8% ~16.9% योगदान का आधा भी नहीं मिलता

सभी पाँच दक्षिणी राज्यों को 15.8% share मिला, जबकि सिर्फ बिहार और UP को मिलाकर लगभग 28% मिला। यह असंतुलन ही दक्षिण भारत में "हम देते हैं, वे लेते हैं" की भावना को जन्म देता है।

16वाँ वित्त आयोग 2026: क्या बदला, क्या नहीं बदला?

1 फरवरी 2026 को Arvind Panagariya की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट Budget के साथ Parliament में पेश की गई। इसने कुछ पुरानी बातें बरकरार रखीं और कुछ नई बातें जोड़ीं।

मानदंड (Criteria) 15वें FC में weight 16वें FC में weight किसे फायदा
Income Distance (गरीबी आधारित) 45% 42.5% गरीब राज्यों को — थोड़ा कम हुआ
Population (2011 Census) 15% 17.5% बड़ी आबादी वाले — UP, Bihar
Demographic Performance (जनसंख्या नियंत्रण) 12.5% 10% कम हुआ — दक्षिण को नुकसान
Area 15% 10% कम हुआ — बड़े भूगोल वाले कम लाभान्वित
Forest & Ecology 10% 10% Same — NE states, Odisha को फायदा
GDP Contribution (नया!) 0% (नहीं था) 10% अमीर राज्यों को — MH, TN, KA, GJ को फायदा
Tax & Fiscal Effort 2.5% 0% (हटाया) GDP contribution ने replace किया

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है — 10% weight GDP contribution को। Earlier commissions ने equalisation logic पर अधिक जोर दिया था। 16th Commission ने explicit रूप से economic output को reward करने का फैसला किया। यह एक paradigm shift है। लेकिन साथ ही — राज्यों की माँग थी कि vertical devolution 41% से बढ़ाकर 50% किया जाए — यह नहीं माना गया। Cesses और Surcharges को divisible pool में शामिल करने की माँग भी खारिज हुई। यह दोनों बातें राज्यों — खासकर दक्षिणी राज्यों — के लिए निराशाजनक हैं।

GST का सच: "उत्पादन" करने वाले राज्यों को नुकसान?

2017 में GST लागू होने के बाद एक बड़ी बहस शुरू हुई। पहले के tax system में राज्यों को manufacturing पर excise duty मिलती थी — यानी जो राज्य अधिक उत्पादन करता था, उसे अधिक revenue मिलता था। GST में tax "point of consumption" पर लगता है — यानी जहाँ goods बिकते हैं, वहाँ tax जाता है।

Gujarat दुनिया का सबसे बड़ा net exporter था — वह goods बनाता था, दूसरे राज्यों को भेजता था। उन goods पर GST — manufacturing state को नहीं, consuming state को मिलता था। इसीलिए UP और Bihar जैसे बड़ी population वाले consumption-heavy राज्यों को GST में proportionally अधिक मिलता है।

तुलना तमिलनाडु उत्तर प्रदेश
Population ~7.9 करोड़ ~24 करोड़ (~3x)
GSDP FY25 ₹31.55 लाख करोड़ ₹24.99 लाख करोड़
Per Capita Income ~₹2.6 लाख ~₹80,000 (3.25x कम)
GST Per Capita UP से 3.7x अधिक कम per capita GST
FC में Tax Share मिलता है 4.10% 17.62%
TN contributes vs gets GDP में ~9% देता है, FC में 4% पाता है GDP में ~8.7% — FC में 17.6% पाता है

यह असंतुलन तमिलनाडु के CM MK Stalin को वह भाषण देने पर मजबूर करता है जिसमें वे कहते हैं — "हम देश का revenue बनाते हैं, लेकिन हमें उचित हिस्सा नहीं मिलता।" Karnataka के CM भी यही कहते हैं — "Bengaluru देश को ₹1 लाख करोड़ से अधिक IT tax देता है, लेकिन उसी Bengaluru के infrastructure के लिए पैसे नहीं मिलते।"

Gujarat बनाम Bihar: दो अलग रास्ते, दो अलग मंज़िलें

शायद भारत में economic divergence की सबसे तीखी तुलना Gujarat और Bihar के बीच है। 1960 में जब Bombay State का विभाजन हुआ, तो Gujarat और Maharashtra दोनों अलग हुए। उसी समय, Bihar एक industrial state था — Tata Steel, Jharia coal mines, Bokaro Steel Plant — सब बिहार की धरती पर थे। आज 65 साल बाद:

पैमाना गुजरात बिहार अंतर
GSDP FY25 ₹27.90 लाख करोड़ ₹8.50 लाख करोड़ Gujarat 3.3x बड़ा
Per Capita Income राष्ट्रीय औसत का 160% राष्ट्रीय औसत का ~32% Gujarat 5x अमीर
Population ~7.5 करोड़ ~13 करोड़ Bihar की population 1.7x ज़्यादा
GDP growth average (2012-24) 8.32% (दूसरा सर्वोच्च) ~9.5% (FY24 में) Bihar तेज़ बढ़ रहा — लेकिन base बहुत कम
FDI आकर्षण Top 3 में consistently Bottom 5 में Industry Gujarat जाती है, Bihar नहीं
Ease of Doing Business Top 5 consistently Bottom quartile Governance और infrastructure का अंतर

Gujarat की success का secret केवल natural resources नहीं — यह policy consistency है। GIFT City, Dahej Petrochemical complex, Surat Diamond market, Amul dairy model — सब long-term planning के नतीजे हैं। Bihar का problem complex है — 1990s में जंगलराज, poor governance, lack of industry, और तब 2000 में Jharkhand का अलग होना — जिसने Bihar से उसका industrial heartland छीन लिया।

75 साल की राजनीति का हिसाब: कौन से factors ने खाई बनाई?

यह असमानता रातों-रात नहीं बनी। इसके पीछे कई कारण हैं — ऐतिहासिक, भौगोलिक, राजनीतिक और नीतिगत।

कारण अमीर राज्यों पर असर गरीब राज्यों पर असर
British Raj की legacy Coastal states (Mumbai, Chennai, Calcutta) — trade centers — industrial base मिला Landlocked states — raw material supplier — hinterland बने रहे
1991 का उदारीकरण Coastal + infrastructure-ready states में FDI आया — MH, TN, KA, GJ Infrastructure कमज़ोर — FDI नहीं आया — UP, Bihar, MP
Education और Human Capital Kerala, TN — literacy 90%+ — skilled workforce — IT, services Bihar, UP — literacy कम — unskilled migration, brain drain
Governance Quality Gujarat, TN — stable governments, industry-friendly policies Bihar (1990s jungal raj), UP (frequent instability) — industry fled
जनसंख्या नियंत्रण Kerala, TN — TFR 1.7-1.8 — demographic dividend Bihar, UP — TFR 2.9-3.2 — large dependent population
राजनीतिक economy Industry lobby powerful — policy business-friendly Caste-based politics dominant — welfare over investment
Infrastructure Ports, highways, airports — better connectivity = better economy Poor roads, erratic power — businesses don't come
State bifurcation Gujarat retained industrial corridor; MH retained Mumbai Bihar ने Jharkhand (industries) खोया; UP ने Uttarakhand खोया

क्या गरीब राज्य "parasite" हैं? — एक ज़रूरी counterargument

इस पूरी बहस में एक counterargument बेहद ज़रूरी है — क्या बिहार और UP सच में "लेते हैं और देते नहीं"? यह सरलीकरण गलत है।

पहली बात — Bihar और UP के मज़दूर पूरे देश की economy चलाते हैं। Mumbai की construction sites, Gujarat की factories, Delhi के घर — सब में Bihar-UP के श्रमिक हैं। उनका श्रम दूसरे राज्यों की GDP बनाता है, लेकिन वे income अपने गृह राज्य में नहीं बना पाते। यह एक "labor export" है जिसका credit उनके राज्य को नहीं मिलता।

दूसरी बात — India के food security का बड़ा हिस्सा इन्हीं राज्यों से आता है। UP चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक है। Punjab-Haryana गेहूँ देते हैं। Bihar आम, मखाना, लीची उगाता है। लेकिन agricultural income GDP में उतनी नहीं आती जितनी services और manufacturing की।

तीसरी बात — इन राज्यों की गरीबी historical neglect का भी नतीजा है। British Raj में Bihar, Odisha, MP — ये raw material extraction zones थे। Manufacturing वहाँ हुई जहाँ British ने ports और cities बनाईं — Mumbai, Calcutta, Chennai। यह एक structural inequality है, न कि इन राज्यों की "अक्षमता"।

Cesses और Surcharges: वह छेद जो राज्यों को नहीं दिखता

एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है जो अक्सर चर्चा से बाहर रहता है — Cesses और Surcharges। जब भी केंद्र सरकार Education Cess, Health Cess, या किसी और cess की घोषणा करती है — यह पैसा divisible pool में नहीं जाता। यानी राज्यों को इसका कोई हिस्सा नहीं मिलता।

16वें वित्त आयोग ने यह माना कि cesses और surcharges को divisible pool में include करने की constitutional अनुमति नहीं है। लेकिन यह भी सुझाया कि केंद्र एक "grand bargain" करे — cesses को नियमित taxes में fold करे और states एक बड़े divisible pool में से कम percentage लें। यह proposal व्यावहारिक है, लेकिन राजनीतिक रूप से कठिन है।

Cess का नाम कहाँ लगता है राज्यों को मिलता है?
Education Cess (2%) Income Tax + Corporation Tax पर ❌ नहीं — केंद्र के पास
Secondary Higher Education Cess (1%) Income Tax + Corporation Tax पर ❌ नहीं
Health & Education Cess (4%) Direct Taxes पर ❌ नहीं
Surcharge on High Income (10-15%) High income taxpayers पर ❌ नहीं — राज्यों की माँग थी, ठुकरा दी

क्या Delimitation इस असमानता को और बढ़ाएगा?

2026 का परिसीमन इस आर्थिक असमानता को एक नया political dimension देता है। अगर UP को 80 से 140+ सीटें मिलती हैं और Tamil Nadu को 39 से 42 — तो Parliament में उन राज्यों की आवाज़ और कमज़ोर होगी जो economy में सबसे अधिक योगदान दे रहे हैं।

यह एक democratic paradox है — जनसंख्या के हिसाब से सही, लेकिन economic contribution के हिसाब से अन्यायपूर्ण। South India के नेता इसे "punishment for development" कहते हैं — जिसने population control किया, वही राजनीतिक रूप से कमज़ोर हुआ।

क्या समाधान है? — एक balanced perspective

समाधान क्या होगा चुनौती
Cesses को Divisible Pool में लाना राज्यों को अधिक पैसा — सभी को फायदा केंद्र की fiscal power कम होगी — political will चाहिए
Vertical Devolution 41% से 50% राज्यों को ₹2 लाख करोड़+ अधिक केंद्र की flagship schemes कैसे fund होंगी?
गरीब राज्यों में targeted manufacturing UP, Bihar, MP में PLI scheme जैसे incentives Infrastructure और governance reform पहले ज़रूरी
Education और Health में समान investment Human capital develop हो — long-term solution 15-20 साल की लंबी process — राजनीतिक अधीरता
State-level governance reform Ease of Doing Business — industry आए राज्य खुद करें — केंद्र force नहीं कर सकता

निष्कर्ष: एक देश, दो भारत — और एक ज़रूरी सवाल

भारत की यह आर्थिक असमानता केवल एक economic problem नहीं है — यह एक political और constitutional challenge भी है। एक तरफ तमिलनाडु और कर्नाटक के नागरिक जो feel करते हैं कि उनका tax पैसा दूसरे राज्यों में जा रहा है। दूसरी तरफ बिहार और UP के नागरिक जो 75 साल से विकास का इंतजार कर रहे हैं।

दोनों सही हैं। और यही इस समस्या की जटिलता है।

16वाँ वित्त आयोग एक कदम आगे है — GDP contribution को weight देकर। लेकिन यह काफी नहीं है। जब तक गरीब राज्यों में education, infrastructure और governance नहीं सुधरती, जब तक cesses को divisible pool में नहीं लाया जाता, और जब तक जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को पुरस्कृत करने की नीति नहीं बनती — यह खाई बढ़ती रहेगी।

और अगर यह खाई बढ़ती रही — तो "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" का सपना एक राजनीतिक नारा बनकर रह जाएगा। क्योंकि एक देश तभी श्रेष्ठ होता है जब उसके सभी हिस्से आगे बढ़ें — केवल उसके कुछ हिस्से नहीं।

आप क्या सोचते हैं — क्या यह उचित है कि जो राज्य अधिक tax देते हैं उन्हें कम वापस मिले? क्या गरीब राज्यों को अधिक fund देना लोकतंत्र की ज़रूरत है या अमीर राज्यों के साथ अन्याय? और क्या Delimitation इस असंतुलन को और बढ़ाएगा? नीचे टिप्पणी में ज़रूर बताएं।

स्रोत / Sources:

1. MoSPI (Ministry of Statistics and Programme Implementation) — State-wise GSDP at Current Prices FY 2024-25 (mospi.gov.in)
2. EAC-PM Working Paper 31/2024 — "Relative Economic Performance of Indian States: 1960-61 to 2023-24" (eacpm.gov.in)
3. 16th Finance Commission Report — tabled in Parliament February 1, 2026 (fincomindia.nic.in)
4. Policy Circle — "16th Finance Commission: Why the north-south tax row has shifted" (February 26, 2026)
5. StatisticsTimes — "GDP of Indian States 2023-24" and "GDP Growth of Indian States 2024-25" (statisticstimes.com)
6. GST Club — "Uttar Pradesh tops Tamil Nadu in GST collection: Myth and Reality" (gstclub.in)
7. IndMoney — "India's Tax Report Card: ITR Filings Double & The State-wise Divide" (December 10, 2025)
8. ETV Bharat — "16th Finance Commission: New formula for Centre-State tax sharing" (February 2024)
9. India Budget — Annex 4: "State-wise Distribution of Net Proceeds of Union Taxes 2026-27" (indiabudget.gov.in)
10. Drishti IAS — "16th Finance Commission Report Analysis" (drishtiias.com)

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