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BRICS Summit 2026 नई दिल्ली — पूरी जानकारी, सदस्य देश और महत्व

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

BRICS Summit 2026 नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले आयोजन को दर्शाता इन्फोग्राफिक — 11 सदस्य देशों का वैश्विक जमावड़ा

12-13 सितंबर 2026 — जब दुनिया की एक-तिहाई ताकत नई दिल्ली में इकट्ठा होगी

12 और 13 सितंबर 2026 यह दो तारीखें भारत के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होंगी। इन दो दिनों में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS Summit होने जा रहा है और यह कोई मामूली diplomatic बैठक नहीं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से कई एक साथ, एक मंच पर, भारत की राजधानी में मौजूद रहेंगे।

यह summit इसलिए भी खास है क्योंकि इसी साल BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। एक ऐसा समूह जो 2001 में सिर्फ एक investment-research शब्द के रूप में जन्मा था, आज दुनिया के 41% वैश्विक GDP (PPP के हिसाब से) का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शक्तिशाली भू-राजनीतिक गठबंधन बन चुका है।

BRICS क्या है, कौन-कौन से देश इसमें शामिल हैं, भारत की मेज़बानी में क्या खास होगा, और यह आयोजन भारत और दुनिया के लिए क्यों मायने रखता है आज पूरी जानकारी, एक ही जगह।

BRICS Summit 2026 — एक नज़र में

Key Facts विवरण
आयोजन 18वां BRICS Summit
तारीख 12-13 सितंबर 2026
मुख्य Venue भारत मंडपम, नई दिल्ली
थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" — प्रधानमंत्री मोदी के "Humanity First" दृष्टिकोण से प्रेरित
भारत की Chairship 1 जनवरी 2026 से — भारत की चौथी बार अध्यक्षता (पहले 2012, 2016, और 2021 में)
ऐतिहासिक महत्व BRICS की स्थापना के 20 साल पूरे होने का जश्न
Chairship के दौरान गतिविधियां भारत के 25 से ज़्यादा शहरों में 350 से ज़्यादा बैठकें और उच्च-स्तरीय आयोजन

BRICS क्या है — नाम से लेकर आज तक की पूरी कहानी

BRICS की शुरुआत किसी सरकारी फैसले से नहीं, बल्कि एक investment bank की research report से हुई थी — जो अपने आप में एक दिलचस्प तथ्य है।

वर्ष घटना
2001 Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O'Neill ने अपनी रिपोर्ट "Building Better Global Economic BRICs" में पहली बार यह शब्द गढ़ा उस समय यह सिर्फ Brazil, Russia, India, China के लिए एक investment-analysis term था, कोई संगठन नहीं
2006 रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पहल पर, इन चार देशों ने UN General Assembly के दौरान एक औपचारिक बैठक की यहीं से BRIC एक वास्तविक राजनीतिक समूह बना
2009 पहला औपचारिक BRIC Summit Yekaterinburg, रूस में
2010 South Africa को शामिल किया गया तभी से "BRIC" का "S" जुड़कर "BRICS" बना
2014 New Development Bank (NDB) की स्थापना Fortaleza, Brazil में हुए 6वें Summit में, ताकि विकासशील देशों को Western-dominated World Bank और IMF का एक विकल्प मिल सके
1 जनवरी 2024 एक बड़ा विस्तार Egypt, Ethiopia, Iran, और UAE औपचारिक रूप से शामिल हुए
बाद में Indonesia और Saudi Arabia भी शामिल हुए, जिससे सदस्यों की संख्या 11 तक पहुंच गई

🔴 BRICS में कौन-कौन से देश हैं — पूरी और सही सूची

यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है — BRICS के 11 पूर्ण सदस्य (full members) हैं, और इसके अलावा कुछ "partner countries" भी हैं जिनका दर्जा अलग है।

श्रेणी देश
मूल संस्थापक सदस्य (2006-2010) Brazil, Russia, India, China, South Africa
2024 में जुड़े नए सदस्य Egypt, Ethiopia, Iran, United Arab Emirates
बाद में जुड़े Indonesia, Saudi Arabia
कुल पूर्ण सदस्य 11 देश
Partner Countries (सहयोगी देश, पूर्ण सदस्य नहीं) Belarus, Bolivia, Cuba, Kazakhstan, Malaysia, Nigeria, Thailand, Uganda, Uzbekistan

एक ज़रूरी स्पष्टीकरण: Pakistan और Malaysia जैसे देशों को अक्सर गलती से BRICS का सदस्य समझ लिया जाता है — लेकिन आधिकारिक तौर पर Pakistan BRICS का सदस्य नहीं है। Malaysia एक "partner country" है, पूर्ण सदस्य नहीं। यह फर्क समझना ज़रूरी है क्योंकि "partner country" का दर्जा पूर्ण सदस्यता से अलग होता है — partner देशों को कुछ बैठकों में भाग लेने का अवसर मिलता है, लेकिन उन्हें वह पूर्ण निर्णय-अधिकार (decision-making rights) नहीं मिलते जो 11 पूर्ण सदस्यों के पास हैं।

🔴 आर्थिक ताकत — क्या सच में BRICS ने G7 को पीछे छोड़ दिया

यह एक बेहद चर्चित दावा है, और आंकड़े इसका काफी हद तक समर्थन भी करते हैं — लेकिन इसे सही context में समझना ज़रूरी है।

साल G7 का Global GDP (PPP) में हिस्सा BRICS का हिस्सा
1995 44.9% 16.9%
2010 34.3% 26.6%
2023-2024 29-29.9% 32.1-36%
2026 (India Chairship, PPP आधार पर) लगभग 41%

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Purchasing Power Parity (PPP) के हिसाब से — जो local prices और currencies की असली क्रय-शक्ति को बेहतर तरीके से दिखाता है — BRICS वाकई G7 से आगे निकल चुका है। हालांकि एक ईमानदार caveat भी ज़रूरी है — इस समूह की सामूहिक ताकत में China और भारत का योगदान सबसे बड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे G7 में अमेरिका का योगदान सबसे बड़ा है। यह एक बेहद विविध (diverse) समूह भी है — ऊर्जा-निर्यातक देश (Brazil, Russia) और ऊर्जा-आयातक देश (China, India) दोनों इसमें शामिल हैं, लोकतंत्र (India, Brazil) और गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं (China, Russia) भी साथ हैं।

भारत की मेज़बानी में सबसे बड़ा प्रस्ताव — UPI का Cross-Border Integration

इस साल की सबसे महत्वपूर्ण भारतीय पहल है — BRICS देशों के बीच डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना (cross-border payment integration)।

इसका मूल विचार बेहद सरल लेकिन क्रांतिकारी है अभी अगर आप UPI का इस्तेमाल सिर्फ भारत में कर सकते हैं। भारत का प्रस्ताव है कि UPI जैसे local payment systems को BRICS के दूसरे देशों के payment infrastructure से जोड़ा जाए ताकि कोई भारतीय नागरिक किसी भी BRICS देश में UPI QR code स्कैन करके भुगतान कर सके, और इसका उल्टा भी हो सके।

De-Dollarisation Push — 2026 की स्थिति विवरण
Cross-Border Payment Framework भारत की Chairship के दौरान BRICS के विदेश मंत्रियों ने local-currency settlement के लिए एक cross-border payment framework पर काम शुरू किया जिसमें राष्ट्रीय payment systems को आपस में जोड़ना शामिल है
Common BRICS Currency एक साझा BRICS मुद्रा (common currency) का विचार जानबूझकर टाला गया है इसके बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और payment infrastructure (जैसे BRICS Pay, UPI-linked framework) पर ज़ोर है
क्यों महत्वपूर्ण इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम होगी, transaction costs घटेंगे, और भारत जैसे देशों की digital payment technology को एक बड़ा वैश्विक मंच मिलेगा

चार शब्द जो इस Summit को Summarize करते हैं

भारत की BRICS थीम — "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" — को चार सरल शब्दों में समझा जा सकता है, जिनका सीधा असर व्यावहारिक नीतियों पर पड़ता है।

शब्द मतलब और व्यावहारिक असर
Resilience (सहनशीलता) किसी भी BRICS देश में climate-related आपदा (बाढ़, भूकंप) आने पर बाकी देश तुरंत मदद के लिए आगे आएंगे यानी आपसी संकट-सहायता (disaster assistance) का एक तंत्र
Innovation (नवाचार) BRICS देश मिलकर एक startup fund बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं — ताकि नई research और innovation को funding मिल सके, और उसका फायदा सभी सदस्य देशों को साझा रूप से मिले
Cooperation (सहयोग) Economy, defence, और अन्य strategic क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच बढ़ता आपसी सहयोग
Sustainability (सततता) कृषि और manufacturing सहित हर क्षेत्र में विकास को पर्यावरण-अनुकूल और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना

Summit से पहले की कूटनीतिक सक्रियता

इस summit को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे ठीक पहले भारत के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों ने अलग-अलग देशों की यात्राएं कीं वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval, विदेश मंत्री S. Jaishankar, और रक्षा मंत्री Rajnath Singh यह सभी अलग-अलग देशों में गए, और खुद प्रधानमंत्री मोदी भी SCO Summit (Shanghai Cooperation Organisation) से लौटने के महज़ 10 दिनों के भीतर फिर से राष्ट्रपति पुतिन, शी जिनपिंग जैसे नेताओं के साथ एक मंच पर होंगे।

ईरान की मौजूदगी — एक बड़ा भू-राजनीतिक संकेत

एक विशेष रूप से उल्लेखनीय पहलू है ईरान की BRICS में सक्रिय भागीदारी। यह उस दौर में हो रहा है जब ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव की छाया बनी हुई है। ऐसे माहौल में ईरान का BRICS में शामिल होकर भारत, रूस, चीन जैसे देशों के साथ मंच साझा करना, अपने आप में एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश माना जा रहा है यह दिखाता है कि पश्चिमी दबाव के बावजूद, वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मंच सक्रिय और मज़बूत बने हुए हैं।

Multipolar World — भारत की बड़ी कूटनीतिक रणनीति

शीत युद्ध (Cold War) के दौर में दुनिया दो खेमों में बंटी थी — अमेरिका का गुट, और सोवियत रूस का गुट। सोवियत संघ के पतन के बाद एक यूनिपोलर वर्ल्ड (unipolar world) बना, जिसमें सिर्फ अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति (superpower) था।

भारत की मौजूदा कूटनीतिक रणनीति इससे बिल्कुल अलग है — भारत एक बहुध्रुवीय दुनिया (multipolar world) बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां कोई एक गुट अकेले पूरी दुनिया पर हावी न हो। यही वजह है कि भारत एक साथ कई अलग-अलग, कभी-कभी परस्पर-विरोधी दिखने वाले मंचों का हिस्सा है:

  • QUAD — अमेरिका के नेतृत्व वाला मंच (US, Japan, Australia, India)
  • BRICS — जिसमें रूस और चीन जैसे US-प्रतिद्वंद्वी देश शामिल हैं
  • ASEAN — दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन

यह रणनीति भारत को किसी एक गुट में पूरी तरह "बंधने" से बचाती है, और उसे हर मंच पर अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से काम करने की स्वतंत्रता देती है — यह भारत की विदेश नीति की एक बुनियादी और सुविचारित (well-thought-out) रणनीति मानी जाती है।

🔴 सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं — "जन-भागीदारी" का प्रयोग

भारत सरकार ने इस बार एक बेहद दिलचस्प रुख अपनाया है — इस पूरे आयोजन को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है।

यही वजह है कि summit सिर्फ नई दिल्ली के भारत मंडपम तक सीमित नहीं — बल्कि देश के 25 से ज़्यादा शहरों में 350 से ज़्यादा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। हर राज्य अपनी-अपनी राजधानी को सजा रहा है, तैयारियां कर रहा है — यह एक तरह से पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल बनाने की कोशिश है।

इस भावना को एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है — जैसे किसी गांव में किसी बेटी की शादी होने पर पूरा गांव उसमें सहयोग करता है, वैसे ही BRICS को एक राष्ट्रीय आयोजन (mega event) के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसमें सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की सहभागिता की अपील की जा रही है — चाहे वह विदेशी मेहमानों का स्वागत हो, या पत्रकारों और observers के सामने भारत की एक सकारात्मक छवि पेश करना हो।

2026 में यह क्यों खास साल है — कई मायनों में एक Milestone Summit

पहलू महत्व
20वां स्थापना वर्ष 2006 से 2026 — दो दशकों की यात्रा का उत्सव
भारत की चौथी Chairship भारत ने पहले 2012, 2016, और 2021 में अध्यक्षता की है — 2026 चौथी बार है
Xi Jinping की संभावित यात्रा अगर यह यात्रा होती है, तो यह 2019 के बाद पहली बार होगा जब चीनी राष्ट्रपति भारत आएंगे — जो भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा
विस्तारित सदस्यता का पहला बड़ा Summit 2024 में हुए बड़े विस्तार (Egypt, Ethiopia, Iran, UAE जुड़ने) के बाद, यह भारत की मेज़बानी में होने वाला पहला summit है — यानी 11-सदस्यीय BRICS की असली परीक्षा भी होगी कि यह इतना बड़ा, इतना diverse समूह किस हद तक एक स्वर में बोल पाता है

एक ईमानदार चुनौती भी — Diversity बनाम Unity

एक निष्पक्ष विश्लेषण के लिए यह भी समझना ज़रूरी है कि BRICS एक ऐसा समूह है जिसमें formal treaties या बाध्यकारी दायित्व (binding obligations) नहीं हैं। इसे अक्सर "जो चीज़ें यह विरोध करता है" (जैसे अमेरिका का वित्तीय वर्चस्व) से ज़्यादा एकजुट माना जाता है, बजाय इसके कि "यह किस चीज़ का समर्थन करता है"। हाल के महीनों में BRICS विदेश मंत्रियों की एक बैठक में Middle East संघर्ष को लेकर मतभेदों की वजह से एक साझा वक्तव्य (joint statement) पर सहमति नहीं बन पाई थी, जिसके बाद भारत को अकेले एक "chair's statement" जारी करना पड़ा।

यह दिखाता है कि BRICS के भीतर China-India जैसे प्रतिद्वंद्वी (rival) देश, democracy-non-democracy का मिश्रण, और अलग-अलग विदेश-नीति प्राथमिकताएं — यह सब मिलकर इस समूह को एकजुट रखना एक सतत चुनौती बनाते हैं। भारत की मेज़बानी में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन मतभेदों के बावजूद एक सार्थक, ठोस साझा घोषणा (joint declaration) निकल पाती है।

निष्कर्ष — भारत के लिए एक बड़ा अवसर, एक बड़ी ज़िम्मेदारी

18वां BRICS Summit सिर्फ एक diplomatic कार्यक्रम नहीं है — यह भारत के लिए दुनिया को अपनी क्षमता, अपनी संस्कृति, और अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका दिखाने का एक बड़ा अवसर है। 25 शहरों में 350 से ज़्यादा बैठकें, UPI का cross-border विस्तार का प्रस्ताव, और दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं की एक साथ मौजूदगी — यह सब मिलकर भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा (international standing) का प्रमाण हैं।

लेकिन साथ ही, यह एक ज़िम्मेदारी भी है — एक ऐसे 11-सदस्यीय, बेहद विविध समूह की मेज़बानी करना, जिसमें आंतरिक मतभेद भी मौजूद हैं, और यह सुनिश्चित करना कि summit सिर्फ formal तस्वीरों तक सीमित न रहे, बल्कि वाकई ठोस, कार्यान्वयन-योग्य (implementable) समझौतों में तब्दील हो। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कहा — यह आयोजन सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक का है, और यह उनके हाथों में है कि वे दुनिया के सामने अपने देश को कैसे पेश करते हैं।

आपको इस BRICS Summit से सबसे ज़्यादा उम्मीद किस चीज़ से है — UPI का global विस्तार, या भारत-चीन संबंधों में सुधार का कोई संकेत? नीचे टिप्पणी में ज़रूर बताएं।

स्रोत / Sources:

1. Telangana Today — "India to host two-day BRICS Summit in Delhi from September 12"
2. Brut Media — "BRICS Summit 2026 In Delhi: Why The World Will Be Watching India In September"
3. Manorama Yearbook — "New Delhi to host 18th BRICS Summit on September 12, 13 | BRICS Chair 2026", August 28, 2026
4. DNA India — "BRICS Summit 2026: What to expect as India hosts leaders in Delhi"
5. Rio Times Online — "BRICS Summit 2026: 11 Members, 10 Partners Explained", August 3, 2026
6. Wikipedia — "18th BRICS summit"
7. Goldman Sachs — "Building Better Global Economic BRICs", 2001
8. Goldman Sachs — "With GS Research Report, 'BRICs' Are Born"
9. GZERO Media — "Graphic Truth: BRICS economies eclipse the G7", October 25, 2024
10. Benelux Chamber of Commerce Shanghai — "BRICS vs. G7: a Tiny Comparison"
11. IPEA (Institute for Applied Economic Research) — "Learn about BRICS"

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