Est. 2025 · लेखक: आकाश दीप

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72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2026: पूरी विजेता सूची, इतिहास और एकता नगर समारोह

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2026 एकता नगर गुजरात में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा — Article 370, अनंत नाग और पूरी विजेताओं की सूची का इन्फोग्राफिक

22 सितंबर 2026, मंगलवार का दिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अलग जगह दर्ज हो गया। गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैचू ऑफ यूनिटी की भव्य पृष्ठभूमि में, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) का समारोह आयोजित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद अपने हाथों से देश के सबसे प्रतिभाशाली फिल्मकारों, अभिनेताओं और तकनीशियनों को सम्मानित किया। यह सिर्फ एक और अवार्ड सेरेमनी नहीं थी बल्कि करीब सात दशकों में पहली बार यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजन नई दिल्ली की सीमाओं से बाहर निकलकर देश के एक अलग हिस्से में पहुंचा।

पहले एक ज़रूरी स्पष्टीकरण विजेताओं की सूची असल में 18 जुलाई 2026 को ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा घोषित कर दी गई थी। आज जो हुआ, वह भव्य पुरस्कार वितरण समारोह (felicitation ceremony) था, जहां महीनों बाद विजेताओं को औपचारिक रूप से मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इस बड़े और पूरी तरह विस्तृत लेख में हम कवर करेंगे नेशनल फिल्म अवार्ड्स की शुरुआत किसने और कब की, सात दशकों का पूरा सफर, इस साल के हर एक बड़े और छोटे विजेता की डिटेल, आज के समारोह का माहौल, सितारों की प्रतिक्रियाएं, और इस आयोजन से जुड़े विवाद सब कुछ एक जगह।

नेशनल फिल्म अवार्ड्स की शुरुआत: आज़ादी के बाद सिनेमा को राष्ट्र-निर्माण का औज़ार बनाने की सोच

कहानी शुरू होती है 1949 से, जब आज़ाद भारत की नई सरकार ने सिनेमा उद्योग की हालत, उसकी गुणवत्ता और समाज पर उसके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए Film Enquiry Committee (फिल्म जांच समिति) का गठन किया। उस दौर में देश के नेता यह मानते थे कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण (nation-building) और विविध भारतीय संस्कृतियों को समझने-समझाने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है। इसी समिति ने सिफारिश की कि सरकार को "State Awards for Films" यानी राज्य फिल्म पुरस्कार शुरू करने चाहिए, ताकि कलात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से उच्च स्तर की फिल्मों को प्रोत्साहन मिले।

इसी सिफारिश पर अमल करते हुए 1954 में यानी आज़ादी के सिर्फ सात साल बाद पहला समारोह आयोजित हुआ। तारीख थी 10 अक्टूबर 1954, स्थान था नई दिल्ली का ऐतिहासिक विज्ञान भवन। उस समय देश के राष्ट्रपति थे डॉ. राजेंद्र प्रसाद, और सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे बी.वी. केसकर। पहले संस्करण में सिर्फ तीन श्रेणियां थीं फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री फिल्म और बाल फिल्म। मराठी फिल्म "श्यामची आई" (निर्देशक: पी. के. अत्रे) ने Best All-India Feature Film का President's Gold Medal जीता यह उस दौर के पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों पर बनी एक भावुक कहानी थी। वहीं "महाबलीपुरम" को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र चुना गया। दिलचस्प बात यह है कि बिमल रॉय की अब क्लासिक मानी जाने वाली फिल्म "दो बीघा ज़मीन" को उस साल सिर्फ Certificate of Merit (प्रशस्ति पत्र) मिला था शीर्ष पुरस्कार नहीं।

धीरे-धीरे विस्तार: कलाकारों की एंट्री और Dadasaheb Phalke Award की शुरुआत

शुरुआती वर्षों में यह पुरस्कार सिर्फ फिल्मों तक सीमित था व्यक्तिगत कलाकारों या तकनीशियनों के लिए कोई अलग श्रेणी नहीं थी। यह बदलाव आया 1967 की फिल्मों के साथ, जब पहली बार अभिनेताओं और तकनीशियनों को व्यक्तिगत रूप से सम्मानित करने की परंपरा शुरू हुई। 1968 में पहली बार Best Actor और Best Actress के पुरस्कार दिए गए उस समय इन्हें औपचारिक नाम नहीं, बल्कि "भरत" (Bharat) और "उर्वशी" (Urvashi) कहा जाता था, जो बाद में मौजूदा नामों में बदल गए। बांग्ला और हिंदी सिनेमा के दिग्गज उत्तम कुमार और हिंदी-सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नर्गिस पहले ऐसे सितारे बने जिन्हें यह सम्मान मिला।

फिर आया 1969 का साल, जब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे सम्मानित पुरस्कार Dadasaheb Phalke Award की शुरुआत हुई। यह पुरस्कार किसी फिल्म व्यक्तित्व के पूरे जीवनभर के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, और इसका नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के यानी "दादासाहेब फाल्के" के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है उन्होंने 1913 में भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म "राजा हरिश्चंद्र" बनाई थी। इस सर्वोच्च पुरस्कार की पहली प्राप्तकर्ता बनीं अभिनेत्री देविका रानी जिन्हें अक्सर भारतीय सिनेमा की "पहली महिला" (First Lady of Indian Cinema) कहा जाता है। उन्होंने 1933 की फिल्म "कर्मा" से डेब्यू किया था, जो पहली भारतीय अंग्रेज़ी-भाषा फिल्म और पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी जिसमें ऑन-स्क्रीन चुंबन दिखाया गया था। देविका रानी ने 1934 में बॉम्बे टॉकीज़ नाम की भारत की पहली पब्लिक लिमिटेड फिल्म कंपनी की भी स्थापना की थी।

Dadasaheb Phalke Award को स्वर्ण कमल (Swarna Kamal) ट्रॉफी, ₹15,00,000 का नकद पुरस्कार और एक शॉल के साथ प्रदान किया जाता है, और इसकी घोषणा भी बाकी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के साथ ही की जाती है, हालांकि इसके लिए चयन प्रक्रिया अलग होती है प्रतिष्ठित फिल्म व्यक्तित्वों की एक विशेष समिति इसकी सिफारिश करती है।

प्रशासनिक सफर: मंत्रालय से लेकर NFDC तक

इन पुरस्कारों के आयोजन की ज़िम्मेदारी भी समय के साथ बदलती रही है। 1954 से 1973 तक इन्हें सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता था। 1973 में सरकार ने Directorate of Film Festivals (DFF) की स्थापना की, जिसने अगले करीब पांच दशकों तक इन पुरस्कारों के आयोजन, जूरी प्रक्रिया के मानकीकरण और श्रेणियों के विस्तार की ज़िम्मेदारी संभाली। फिर 2022-23 में एक बड़ा प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ, जब सरकार ने DFF को National Film Development Corporation of India (NFDC) में विलय कर दिया और अब से यही संस्था नेशनल फिल्म अवार्ड्स सहित भारत के प्रमुख फिल्म-संबंधी आयोजनों का संचालन करती है।

इन सात दशकों में पुरस्कारों का दायरा भी काफी बढ़ा है। शुरुआत में सिर्फ मुट्ठी भर श्रेणियां थीं, लेकिन आज यह सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, संगीत, पार्श्वगायन (playback singing), स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, मेकअप, साउंड, कोरियोग्राफी, एक्शन/स्टंट कोरियोग्राफी और विज़ुअल इफेक्ट्स सहित फिल्म-निर्माण के लगभग हर विभाग को कवर करता है। यह मूल "State Awards for Films" से बढ़कर भारत की विविध फिल्म इंडस्ट्रीज़ को समेटने वाला एक विशाल राष्ट्रीय मंच बन चुका है।

पुरस्कारों की संरचना: स्वर्ण कमल बनाम रजत कमल

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मुख्यतः तीन बड़े हिस्सों में बंटे होते हैं Feature Film (फीचर फिल्म), Non-Feature Film (नॉन-फीचर फिल्म, यानी डॉक्यूमेंट्री/शॉर्ट फिल्म/एनिमेशन) और Best Writing on Cinema (सिनेमा पर लेखन)। हर श्रेणी में सबसे बड़े सम्मान को "स्वर्ण कमल" (Golden Lotus) कहा जाता है, जबकि बाकी तकनीकी और भाषाई श्रेणियों को "रजत कमल" (Silver Lotus) से सम्मानित किया जाता है। दोनों के साथ एक प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार दिया जाता है स्वर्ण कमल विजेताओं को आमतौर पर ₹3,00,000 और रजत कमल विजेताओं को ₹2,00,000 प्रति पुरस्कार मिलते हैं, जबकि किताबों और फिल्म आलोचना श्रेणी में यह राशि ₹1,00,000 होती है।

72वें पुरस्कार: कितनी एंट्री आईं, जूरी कैसे बनी

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2024 में प्रदर्शित हुई फिल्मों के लिए हैं यानी 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 के बीच Central Board of Film Certification (CBFC) से प्रमाणित फिल्में इसके लिए पात्र थीं। इस बार फीचर फिल्म श्रेणी में कुल 400 एंट्री आईं, नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी में 161, सिनेमा पर लिखी किताबों की श्रेणी में 38, और फिल्म समीक्षकों की श्रेणी में 24 एंट्री जमा हुईं। कोई भी भारतीय भाषा में बनी, 16mm, 35mm, व्यापक फिल्म गेज या डिजिटल फॉर्मेट में शूट हुई और सिनेमाघरों, वीडियो या डिजिटल माध्यम से रिलीज़ हुई फिल्म इसके लिए योग्य थी डब की गई, संपादित या दोबारा प्रकाशित फिल्में इसमें शामिल नहीं हो सकती थीं।

फीचर फिल्म जूरी की प्रक्रिया दो स्तरों पर हुई एक केंद्रीय समिति और पांच क्षेत्रीय समितियां, जो भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर बनाई गई थीं: उत्तर क्षेत्र (भोजपुरी, डोगरी, अंग्रेज़ी, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी, उर्दू), पूर्व क्षेत्र (असमिया, बांग्ला, ओडिया व पूर्वोत्तर भाषाएं), पश्चिम क्षेत्र (गुजराती, कोंकणी, मराठी), दक्षिण-I (मलयालम, तमिल) और दक्षिण-II (कन्नड़, तेलुगु)। केंद्रीय जूरी की अध्यक्षता मशहूर मलयालम फिल्मकार जयराज ने की, जिसमें हर क्षेत्रीय समिति के प्रमुख भी शामिल थे। हर क्षेत्रीय समिति में एक प्रमुख और तीन-चार सदस्य होते थे, और नियम के अनुसार हर क्षेत्रीय समिति के प्रमुख और कम से कम एक अन्य सदस्य उस क्षेत्र से बाहर के होने अनिवार्य थे ताकि निष्पक्षता बनी रहे। नॉन-फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता असीम सिन्हा ने की, जबकि सिनेमा पर लेखन की जूरी का नेतृत्व ए. चंद्रशेखर ने किया।

बड़ी श्रेणियों में विजेता — पूरी सूची

पुरस्कार फिल्म / व्यक्ति भाषा
बेस्ट फीचर फिल्म (स्वर्ण कमल) Article 370 — निर्माता: Jio Studios व B62 Studios; निर्देशक: आदित्य सुहास जांभले हिंदी
बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर (स्वर्ण कमल) रणदीप हुड्डा — Swatantrya Veer Savarkar हिंदी
बेस्ट पॉपुलर फिल्म (वाइडस्प्रेड एंटरटेनमेंट) Kalki 2898 AD — निर्माता: Vyjayanthi Movies; निर्देशक: नाग अश्विन तेलुगु
बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म 35 Chinna Katha Kaadu — निर्माता: S Originals व Waltair Productions; निर्देशक: नंदा किशोर एमानी तेलुगु
बेस्ट डायरेक्शन राजकुमार पेरियासामी — Amaran तमिल
फिल्म जो राष्ट्रीय, सामाजिक व पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा दे Captain Miller — निर्माता: Sathya Jyothi Films; निर्देशक: अरुण मैथेस्वरन तमिल
बेस्ट एक्टर (संयुक्त) मामूटी — Bramayugam, कार्तिक आर्यन — Chandu Champion मलयालम / हिंदी
बेस्ट एक्ट्रेस यामी गौतम — Article 370 हिंदी
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर संजय मिश्रा — Bhakshak हिंदी
बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (संयुक्त) सचना नामिदास — Maharaja, रूपाश्री वरकाड़ी — Mithya तमिल / कन्नड़
बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (संयुक्त) अतिश एस. शेट्टी (Mithya), अरुंदेव पोथुला (35 Chinna Katha Kaadu), ऋद्धिमान बनर्जी, तपोमय देब व गीताश्री चक्रवर्ती (Onko Ki Kothin) कन्नड़ / तेलुगु / बंगाली
बेस्ट पुरुष पार्श्वगायक अभय जोधपुरकर — Gharat Ganpati (गीत: "Navasachi Gauri Mazi") मराठी
बेस्ट महिला पार्श्वगायिका वैकोम विजयालक्ष्मी — ARM (गीत: "Angu Vaana Konilu") मलयालम
बेस्ट सिनेमैटोग्राफी शेहनाद जलाल — Bramayugam मलयालम
बेस्ट स्क्रीनप्ले (ओरिजिनल) सुकुमार — Pushpa 2: The Rule तेलुगु
बेस्ट स्क्रीनप्ले (एडाप्टेड) योगेश देशपांडे — Swargandharva Sudhir Phadke मराठी
बेस्ट डायलॉग्स वेंकी अटलूरी — Lucky Baskhar तेलुगु
बेस्ट साउंड डिज़ाइन मानस चौधरी — Bhool Bhulaiyaa 3 हिंदी
बेस्ट एडिटिंग आर. कलैवन्नन — Amaran तमिल
बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन नितिन ज़िहानी चौधरी — Kalki 2898 AD तेलुगु
बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइन (संयुक्त) दीपाली नूर व शीतल शर्मा — Pushpa 2: The Rule तेलुगु
बेस्ट मेकअप पी. रवि कुमार — Committee Kurrollu तेलुगु
बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्शन (गीत) शाश्वत सचदेव — Article 370 हिंदी
बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्शन (बैकग्राउंड स्कोर) जी.वी. प्रकाश कुमार — Amaran तमिल
बेस्ट लिरिक्स मनोज मुंतशिर — Maidaan (गीत "Jaane Do") हिंदी
बेस्ट कोरियोग्राफी विजय गांगुली — Stree 2 (गीत "Aaj Ki Raat") हिंदी
बेस्ट स्टंट कोरियोग्राफी अनल अरासु — Maharaja तमिल
सबसे ज़्यादा पुरस्कार जीतने वाली फिल्में Amaran, Article 370, Mithya — तीन-तीन पुरस्कार प्रत्येक —
स्पेशल मेंशन धनुष (अभिनेता, Captain Miller), सुरेन जी (साउंड मिक्स इंजीनियर, Meiyazhagan) तमिल

क्षेत्रीय भाषाओं में बेस्ट फिल्म — पूरी सूची

हर साल की तरह इस बार भी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हर भाषा के लिए अलग-अलग बेस्ट फीचर फिल्म पुरस्कार दिए गए, ताकि भारत की भाषाई विविधता को उचित सम्मान मिले:

भाषा बेस्ट फिल्म निर्देशक
असमिया Juiphool जदुमोनी दत्ता
बंगाली Chaalchitra Ekhon अंजन दत्त
गुजराती Maaran अभिषेक जैन
हिंदी Srikanth तुषार हीरानंदानी
कन्नड़ Mithya सुमंत भट
कोंकणी Mog Asum राधेश्याम पिपलवा व एग्नेलो एंजेलो ब्रगांज़ा
मलयालम Feminichi Fathima फासिल मुहम्मद
मणिपुरी Sunita युमनाम अजीत सिंह
मराठी Mu. Po. Bombilwaadi परेश मोकाशी
ओडिया Lahari अमर्त्य भट्टाचार्य
तमिल Raayan धनुष
तेलुगु Committee Kurrollu यादू वामसी
गढ़वाली (आठवीं अनुसूची से बाहर) Dholi दिनेश पी. भोंसले
तुलु (आठवीं अनुसूची से बाहर) Imbu शिवध्वज शेट्टी

गढ़वाली और तुलु जैसी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची से बाहर होने के बावजूद अलग पुरस्कार दिया जाना यह दिखाता है कि नेशनल फिल्म अवार्ड्स अब सिर्फ बड़ी और संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त भाषाओं तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की छोटी-बड़ी हर भाषाई सिनेमा परंपरा तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

Dadasaheb Phalke Award 2026: अनंत नाग को खड़े होकर मिला सम्मान

इस साल का सबसे भावुक और तालियों से गूंजने वाला पल रहा कन्नड़ और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दिया गया Dadasaheb Phalke Award। 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक में जन्मे अनंत नाग ने 1970 के दशक की शुरुआत में अभिनय करियर शुरू किया था कन्नड़ में "संकल्प" से डेब्यू किया, और हिंदी सिनेमा में पहचान बनाई श्याम बेनेगल की मशहूर फिल्म "अंकुर" से। पांच दशकों से भी लंबे करियर में उन्होंने छह भारतीय भाषाओं में 300 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया है। उनका सबसे यादगार काम शायद दूरदर्शन की सदाबहार सीरीज़ "मालगुडी डेज़" में रहा, जिसने उन्हें पीढ़ियों के दर्शकों के दिलों में जगह दी।

उनके नाम पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और पांच कर्नाटक राज्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दर्ज हैं, और 2025 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से भी सम्मानित किया था। इस पुरस्कार की घोषणा 16 सितंबर 2026 को हुई थी। आज के समारोह में जब उन्हें मंच पर बुलाने से पहले उनके करियर की एक छोटी फिल्म दिखाई गई जिसमें उनकी अलग-अलग फिल्मों के क्लिप शामिल थे तो पूरा हॉल खड़े होकर तालियां बजाने लगा (standing ovation)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारतीय सिनेमा की एक बड़ी विशेषता को भी उजागर करता है एक ऐसा करियर जो भाषाओं और दशकों की सीमाओं को पार करके पूरे देश की साझा सिनेमाई स्मृति (shared cinematic memory) का हिस्सा बन गया।

आज का समारोह: कौन-कौन पहुंचा, कैसा रहा माहौल

एकता नगर में आयोजित इस भव्य समारोह में हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। यामी गौतम अपने पति और फिल्मकार आदित्य धर के साथ पहुंचीं दोनों ने काली पोशाक पहनी थी, यामी ने काली साड़ी और आदित्य ने काला बंदगला चुना था। आदित्य धर मंच पर गए और Article 370 के लिए बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार लिया, जबकि यामी दर्शकों में बैठकर उनके लिए तालियां बजाती रहीं। इसके अलावा मामूटी, कार्तिक आर्यन, रणदीप हुड्डा, अनंत नाग और संजय मिश्रा जैसे कई बड़े नाम भी समारोह में मौजूद रहे।

समारोह से पहले यामी गौतम ने अपने पहले राष्ट्रीय पुरस्कार को लेकर कहा "यह बहुत बड़ी बात है। यह किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी स्वीकृति है जो उसे मिल सकती है। मैं अभी भी इस पल को महसूस करने की कोशिश कर रही हूं। Article 370 ने मुझे बहुत कुछ दिया।" पुरस्कार मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने युवा कलाकारों को सलाह भी दी "अपना सिर झुकाकर मेहनत करते रहो, और भरोसा रखो कि ज़िंदगी आपकी ईमानदारी और मेहनत का इनाम ज़रूर देगी। आपको नहीं पता होता कि ज़िंदगी ने आपके लिए क्या तय कर रखा है। बस अपना काम ईमानदारी से करते रहो, एक दिन आप अपनी मंज़िल तक ज़रूर पहुंचोगे।" उन्होंने समारोह को दिल्ली से बाहर आयोजित करने पर भी टिप्पणी की "देश भर की अलग-अलग परंपराओं और संस्कृतियों से कई फिल्म कलाकार एक छत के नीचे जमा हुए, जो स्टैचू ऑफ यूनिटी के महत्व का प्रतीक है।"

कार्तिक आर्यन के लिए भी यह पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार था उन्होंने मुरलीकांत पेटकर की बायोपिक "चंदू चैंपियन" में उनकी भूमिका के लिए यह सम्मान जीता, जिसके लिए उन्हें पहले ही फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका था।

एकता नगर, गुजरात — 70 साल में पहली बार दिल्ली से बाहर समारोह

इस साल के आयोजन की सबसे चर्चित बात रही इसका स्थान। सात दशकों के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह नई दिल्ली से बाहर आयोजित हुआ स्टैचू ऑफ यूनिटी के लिए मशहूर एकता नगर (पूर्व नाम केवडिया), गुजरात में। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने और भारत की क्षेत्रीय व सांस्कृतिक विविधता को उजागर करने के मकसद से उठाया गया है यानी आने वाले वर्षों में यह समारोह अलग-अलग राज्यों में आयोजित हो सकता है, और अब यह सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा।

हालांकि इस फैसले की आलोचना भी हुई है महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर एक राष्ट्रीय सिनेमा आयोजन को राजधानी से बाहर ले जाने की ज़रूरत ही क्यों पड़ी, खासकर तब जब मुंबई भारतीय फिल्म उद्योग की पारंपरिक राजधानी मानी जाती है और वहीं बॉलीवुड सहित देश के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो मौजूद हैं। सरकार और आलोचकों दोनों के अपने-अपने तर्क हैं: सरकार इसे विकेंद्रीकरण (decentralisation) और सांस्कृतिक समावेशिता बता रही है, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक निर्णय के तौर पर देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि इसका समय (timing) क्यों चुना गया। यह बहस आने वाले वर्षों में भी जारी रहने की संभावना है, खासकर अगर समारोह लगातार अलग-अलग राज्यों में होता रहे।

Article 370 की जीत: तारीफ और सवाल, दोनों साथ-साथ

इस साल की सबसे बड़ी विजेता फिल्म रही "Article 370" जो 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की घटनाओं पर आधारित एक राजनीतिक एक्शन-थ्रिलर है। यह फिल्म छह अध्यायों में बंटी है और इसकी कहानी NIA अधिकारी ज़ूनी हस्कर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आतंकी नेता बुरहान वानी के ठिकाने की जानकारी हासिल करने के लिए मैनीक्योरिस्ट बनकर उसकी प्रेमिका साबिया को ब्लैकमेल करती है, और अपने दोस्त व CRPF अधिकारी यश चौहान की मदद से बिना अपने वरिष्ठों की अनुमति के एक सफल ऑपरेशन चलाकर उसे मार गिराती है।

आदित्य सुहास जांभले द्वारा निर्देशित और आदित्य धर, ज्योति देशपांडे व लोकेश धर द्वारा निर्मित इस फिल्म में यामी गौतम धर और प्रियामणि मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने बेस्ट फीचर फिल्म के अलावा बेस्ट एक्ट्रेस (यामी गौतम) और बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्शन (शाश्वत सचदेव) कुल तीन पुरस्कार जीते। यह फिल्म 23 फरवरी 2024 को रिलीज़ हुई थी और सिर्फ ₹20 करोड़ के बजट में ₹110 करोड़ से ज़्यादा की कमाई कर चुकी है — यानी व्यावसायिक रूप से भी यह एक सफल फिल्म रही।

फिल्म को इसके निर्देशन, कथा-शैली और यामी गौतम के अभिनय के लिए समीक्षकों की सराहना मिली, लेकिन साथ ही इसे लेकर एक आलोचनात्मक पक्ष भी मौजूद रहा है 2024 के आम चुनावों से ठीक पहले रिलीज़ हुई इस फिल्म पर कुछ समीक्षकों ने तथ्यों की तोड़-मरोड़ और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में झुका हुआ नैरेटिव पेश करने का आरोप लगाया था, कुछ ने तो इसे "प्रोपेगेंडा" (propaganda) तक करार दिया था।

यह कोई पहला मौका नहीं जब किसी राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय वाली फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बहस छिड़ी हो। इससे पहले 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2023 की फिल्मों के लिए) में "द केरला स्टोरी" को बेस्ट डायरेक्शन और बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार मिलने पर केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री ने कड़ा विरोध जताया था, यह आरोप लगाते हुए कि फिल्म एक विवादित और अपुष्ट दावे (32,000 महिलाओं के जबरन धर्मांतरण) पर आधारित थी और इसे सांप्रदायिक एजेंडे के तहत पुरस्कृत किया गया। यह दिखाता है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कला और तकनीक के जश्न के साथ-साथ, कई बार राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन जाते हैं जो किसी भी सरकारी सांस्कृतिक संस्था के लिए एक स्वाभाविक चुनौती है, और आलोचकों व समर्थकों के बीच यह बहस शायद आगे भी जारी रहेगी।

नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी: डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्मों के विजेता

फीचर फिल्मों के अलावा नॉन-फीचर (डॉक्यूमेंट्री/शॉर्ट फिल्म/एनिमेशन) श्रेणी में भी कई दिलचस्प नतीजे रहे। "Bhangaar" (मराठी-अंग्रेज़ी, निर्माता व निर्देशक: सुमिरा रॉय) को बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म चुना गया। दिलचस्प संयोग यह रहा कि खुद स्टैचू ऑफ यूनिटी पर बनी डॉक्यूमेंट्री "Statue of Unity Ekta ka Prateek" (निर्देशक: आनंद एल. राय) को बेस्ट डायरेक्शन का पुरस्कार मिला जो इस साल के आयोजन स्थल के हिसाब से एक प्रतीकात्मक तालमेल भी माना जा रहा है। संताली भाषा की फिल्म "Angen" (निर्देशक: रवि राज मुर्मू) को बेस्ट डेब्यू फिल्म का सम्मान मिला।

रजत कमल श्रेणी में "Kakori" (हिंदी) को बेस्ट बायोग्राफिकल/हिस्टोरिकल फिल्म, "Main Nida" (हिंदी) को बेस्ट आर्ट्स/कल्चरल फिल्म, "Ram-Nami" (हिंदी, निर्देशक: भरतबाला गणपति) को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री, "Piplantri: A Tale of Eco Feminism" को सामाजिक व पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म, "Touched as Water" को बेस्ट एनिमेशन फिल्म, और मराठी फिल्म "Hamsafar" को बेस्ट शॉर्ट फिल्म का सम्मान मिला। "Life in Loom" (जिसमें अंग्रेज़ी, तमिल, हिंदी, असमिया व बंगाली भाषाओं का इस्तेमाल हुआ) को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार मिला, जिसे एडमंड रैनसन ने शूट किया था।

सिनेमा पर लेखन: किताबें और फिल्म समीक्षा

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है "Best Writing on Cinema" जो सिनेमा को एक कला-रूप के तौर पर समझने, सराहने और उस पर लेखन-आलोचना को बढ़ावा देने के लिए दिया जाता है। इस साल बेस्ट बुक ऑन सिनेमा का पुरस्कार कन्नड़ भाषा की किताब "Naaniruvude Nimagaagi Naadiruvude Nanagaagi: Kannada Cinemada Thathva Matthu Rajakeeya" को मिला, जिसे प्रदीप कुमार शेट्टी के. ने लिखा और मिरर पुस्तक ने प्रकाशित किया। वहीं Best Film Critic का सम्मान संजीव श्रीवास्तव को मिला।

निष्कर्ष

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सिर्फ भारतीय सिनेमा की तकनीकी और कलात्मक उपलब्धियों का जश्न भर नहीं थे — यह आयोजन अपने आप में कई मायनों में ऐतिहासिक रहा: सात दशकों में पहली बार दिल्ली से बाहर, एक ऐसे राजनीतिक विषय पर बनी फिल्म को शीर्ष सम्मान, और कन्नड़ सिनेमा के एक दिग्गज कलाकार को जीवनभर के योगदान का सर्वोच्च सम्मान जो पूरे हॉल की खड़े होकर की गई तालियों के साथ मिला। 1954 में "श्यामची आई" से शुरू हुआ यह सफर आज दर्जनों भाषाओं, सैकड़ों श्रेणियों और पूरे देश के सिनेमा को समेटने वाला एक विशाल मंच बन चुका है — असमिया से लेकर तुलु तक, बड़े बजट की तेलुगु ब्लॉकबस्टर से लेकर संताली भाषा की एक डेब्यू फिल्म तक। भले ही हर साल की तरह इस बार भी कुछ चुनावों को लेकर तारीफ और आलोचना, दोनों साथ-साथ चलती रहीं, लेकिन यह आयोजन एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि भारतीय सिनेमा की विविधता — भाषाई भी, और विषयगत भी — कितनी व्यापक है।

आपकी नज़र में इस साल का सबसे योग्य विजेता कौन रहा? और क्या आपको लगता है कि नेशनल फिल्म अवार्ड्स को अलग-अलग राज्यों में घुमाना एक अच्छा फैसला है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं।

स्रोत / Sources:

1. Press Information Bureau (PIB) — "72nd National Film Awards for the year 2024 Announced" (pib.gov.in, 18 जुलाई 2026)
2. Wikipedia — "72nd National Film Awards", "Dadasaheb Phalke Award" एवं "Article 370 (film)"
3. India TV News — "National Film Awards History and Origin" (indiatvnews.com, 22 सितंबर 2026)
4. The Statesman — "From Shyamchi Aai to the 72nd edition, National Film Awards mark seven decades" (सितंबर 2026)
5. ANI — "'Article 370' sweeps three honours at 72nd National Film Awards" (aninews.in, 22 सितंबर 2026)
6. ETV Bharat — "72nd National Film Awards: Yami Gautam, Kartik Aaryan, Randeep Hooda Receive Their First Honours" (22 सितंबर 2026)
7. Outlook India — "72nd National Film Awards: Mammootty, Kartik Aaryan And Yami Gautam Honoured By President Droupadi Murmu"
8. Morung Express (IANS) — "72nd National Film Awards: Yami Gautam Dhar reacts to her big win"
9. Dainik Jagran English — "National Film Awards 2026: Ceremony, Winners & Facts" (सितंबर 2026)
10. Deccan Herald / Gulf News — "Kerala minister alleges Sangh Parivar agenda behind national award to The Kerala Story" (2025, पृष्ठभूमि संदर्भ)
11. PIB India (Substack) — "The National Film Awards" — इतिहास और Dadasaheb Phalke Award पर विशेष लेख
12. Sunday Guardian Live — "72nd National Film Awards 2026 Winners List"

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