De-Dollarisation क्या है? भारत और मोदी का असली रोल समझिए
लेखक: आकाश दीप | युगबोध
वह शब्द जिसे लेकर सबसे ज़्यादा शोर है, लेकिन सबसे कम समझा गया है
पिछले कुछ सालों में "De-Dollarisation" शायद अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र का सबसे ज़्यादा चर्चित, लेकिन सबसे ज़्यादा गलत-समझा जाने वाला शब्द बन चुका है। कहीं इसे "डॉलर के अंत" के रूप में पेश किया जाता है, कहीं इसे सिर्फ "रूस-चीन की एक चाल" बताया जाता है, और कहीं इसे भारत के लिए एक बड़ा राष्ट्रवादी अवसर की तरह दिखाया जाता है। असलियत इन तीनों ही दावों से कहीं ज़्यादा जटिल, और कहीं ज़्यादा दिलचस्प है।
Rio Times के एक हालिया विश्लेषण ने इसे एक बेहद सटीक तरीके से कहा है — "रूस को de-dollarisation की ज़रूरत है, चीन को इससे सबसे ज़्यादा फायदा होगा, और भारत इसकी रफ़्तार को नियंत्रित करता है।" यही तीन-कोणीय (triangular) रिश्ता पूरी de-dollarisation कहानी की जटिलता को समझा देता है — और इसी में भारत और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका सबसे दिलचस्प, सबसे सोची-समझी, और सबसे कम समझी गई है।
आज हम इसे पूरी तरह, हर कोण से समझेंगे — De-dollarisation क्या है, यह क्यों शुरू हुआ, भारत और मोदी सरकार का असली, nuanced रुख क्या है, Trump की धमकियां क्या कहती हैं, और इसका geopolitical भविष्य क्या हो सकता है।
De-Dollarisation है क्या — सरल भाषा में समझिए
De-Dollarisation का मतलब है — वह प्रक्रिया जिसमें देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अपने विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) के लिए अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करते हैं, और इसकी जगह द्विपक्षीय समझौतों में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (national currencies) या मुद्राओं के किसी समूह (basket of currencies) का इस्तेमाल करते हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से, अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख reserve currency और trade currency रहा है — वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा dollar में होता है, ज़्यादातर देश अपने foreign reserves dollar में रखते हैं, और oil जैसी commodities की कीमतें भी परंपरागत रूप से dollar में तय होती हैं (जिसे "petrodollar" व्यवस्था कहा जाता है)।
यह आंदोलन शुरू क्यों हुआ — असली ट्रिगर
| ट्रिगर | विवरण |
|---|---|
| 2022 — रूस पर प्रतिबंध | यूक्रेन युद्ध के बाद, अमेरिका और सहयोगी देशों ने रूस के केंद्रीय बैंक (central bank) की करीब 50% संपत्ति — लगभग $300 अरब — जब्त (freeze) कर दी, और रूस को SWIFT (अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संदेश प्रणाली) से बाहर कर दिया। इसमें $207 अरब यूरो में, $67 अरब डॉलर में, और $37 अरब ब्रिटिश पाउंड में जमा था। |
| "Dollar Weaponization" का डर | इस घटना ने 40 से ज़्यादा देशों को चिंतित कर दिया — क्योंकि इसने साबित कर दिया कि dollar-based वित्तीय व्यवस्था को किसी भी देश के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, अगर वह देश अमेरिका की भू-राजनीतिक नीतियों से असहमत हो |
| Reserve Diversification | केंद्रीय बैंक अब अपने foreign reserves को अमेरिकी Treasury bonds से हटाकर अन्य assets (जैसे सोना) में diversify कर रहे हैं — US debt में विदेशी हिस्सेदारी 2015 के 34% से घटकर 2025 में लगभग 25% रह गई है |
| Gold की वापसी | सोना एक बार फिर एक प्रमुख "safety" asset के रूप में उभरा है — यही वजह है कि global gold prices में हाल के सालों में जबरदस्त तेज़ी देखी गई है |
🔴 भारत का असली रुख — "Brake" वाली भूमिका
यह वह हिस्सा है जिसे सबसे ज़्यादा गलत समझा जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि भारत, चीन और रूस के साथ मिलकर अमेरिकी डॉलर को उखाड़ फेंकने (dethrone) की कोशिश कर रहा है। असलियत इससे बिल्कुल अलग और कहीं ज़्यादा सूक्ष्म (nuanced) है।
विदेश मंत्री जयशंकर का बिल्कुल स्पष्ट बयान
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान बिल्कुल साफ शब्दों में कहा — "भारत ने कभी सक्रिय रूप से अमेरिकी डॉलर को निशाना नहीं बनाया है।" इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने भी एक आधिकारिक बयान में दोहराया — "De-dollarisation को लेकर, विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में हमारी कोई नीति या रणनीति नहीं है।"
RBI Governor का "Step-by-Step" दृष्टिकोण
अगस्त 2026 में RBI Governor Sanjay Malhotra ने इस पूरी बहस को एक बेहद संतुलित लेकिन स्पष्ट दिशा दी — भारत रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "धीरे-धीरे, कदम-दर-कदम" (step by step, not all at once) प्रचलित करेगा, न कि एक साथ। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी renminbi (चीनी युआन) के नेतृत्व वाले मुद्रा-क्षेत्र (zone) का समर्थन नहीं करेगा।
| भारत की वास्तविक स्थिति — Key Facts | विवरण |
|---|---|
| रुपया अभी भी पूर्ण रूप से convertible नहीं | बड़े capital flows के लिए rupee अभी भी सीमित (restricted) है — यानी बड़े पैमाने पर cross-border transfers अब भी dollar के ज़रिए ही होते हैं |
| एक ढील (relaxation) दी गई | अगस्त 2025 में RBI ने एक नियम आसान किया — अब किसी विदेशी बैंक को rupee account खोलने के लिए RBI की पूर्व-अनुमति (prior sign-off) की ज़रूरत नहीं |
| Common BRICS Currency का विरोध | भारत ने कई मौकों पर स्पष्ट रूप से एक साझा BRICS मुद्रा (common currency) के विचार से खुद को अलग किया है — यह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, एक consistent नीतिगत रुख है |
| Dollar अभी भी 88-89% forex turnover में | वैश्विक स्तर पर 2025 में currency trades का 89.2% अब भी किसी-न-किसी रूप में dollar से जुड़ा हुआ था — de-dollarisation एक "क्रांति" नहीं, बल्कि एक धीमी, तकनीकी प्रक्रिया है |
फिर भारत क्या कर रहा है — सिर्फ "ना" नहीं, एक Strategic "हां भी है"
यह समझना ज़रूरी है कि भारत का रुख सिर्फ "de-dollarisation को नकारना" नहीं है। भारत एक ही समय में दो अलग-अलग दिशाओं में काम कर रहा है एक तरफ formal de-dollarisation से दूरी, दूसरी तरफ रुपये के व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीयकरण (internationalisation) की तैयारी।
1. द्विपक्षीय Local-Currency Settlements — पहले से चल रहा एक शांत बदलाव
| भागीदार देश | मुद्रा-व्यवस्था |
|---|---|
| रूस | Rupee-Rouble settlement — रूस के साथ लगभग पूरा व्यापार अब rupee/ruble में हो चुका है |
| UAE | Rupee-Dirham settlement की सक्रिय पहल |
| Malaysia | local currencies में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक औपचारिक समझौता — Malaysian PM Anwar Ibrahim की भारत यात्रा के दौरान |
| China | कुछ हद तक rupee-yuan swaps, लेकिन भारत यहां बेहद सतर्क रहा है — geopolitical प्रतिद्वंद्विता (rivalry) की वजह से |
2. UPI का Global Expansion — भारत का सबसे बड़ा Practical Tool
जैसा हमने पिछले article में देखा, भारत का सबसे बड़ा प्रस्ताव BRICS Summit 2026 में UPI जैसे payment systems को cross-border integrate करना है। यह de-dollarisation का एक व्यावहारिक, ज़मीनी-स्तर का approach है — बजाय किसी बड़ी, टकरावपूर्ण (confrontational) मुद्रा-क्रांति के।
🔴 3. Digital Rupee (e-₹) और CBDC Interoperability — RBI का Strategic Proposal
यह शायद सबसे कम चर्चित, लेकिन सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम है। RBI ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव सौंपा है — BRICS देशों के Central Bank Digital Currencies (CBDCs) को आपस में जोड़ने (link करने) का, ताकि cross-border trade और tourism payments आसान हो सकें।
| RBI का CBDC Proposal — मुख्य बातें | विवरण |
|---|---|
| दृष्टिकोण | एक single supranational currency बनाने के बजाय, अलग-अलग राष्ट्रीय digital currencies (India का e-Rupee, Brazil का Drex, आदि) को आपस में interconnect करना |
| मकसद | तेज़, सस्ता cross-border settlement — बिना किसी देश की राष्ट्रीय मौद्रिक संप्रभुता (monetary sovereignty) से समझौता किए |
| भारत के लिए फायदा | Digital Rupee को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मज़बूत स्थिति मिलती है, बिना किसी बड़े राजनीतिक टकराव के जोखिम के |
🔴 "The Unit" — वह Gold-Backed Currency जो चर्चा में है
2026 की सबसे नई और दिलचस्प concept है — "The Unit" — एक प्रस्तावित gold-backed digital settlement token, जिसका pilot 2026 में शुरू हुआ।
| "The Unit" — तकनीकी विवरण | जानकारी |
|---|---|
| Backing Structure | 40% physical gold + 60% BRICS मुद्राओं का basket |
| Technology | Cardano blockchain पर संचालित, wholesale interbank settlements के लिए |
| यह common BRICS currency नहीं | यह एक token/settlement mechanism है, आम जनता के इस्तेमाल के लिए नहीं — सिर्फ बैंकों के बीच बड़े transactions के लिए |
| भारत का रुख | कुछ geopolitical विश्लेषकों का मानना है कि भारत जानबूझकर एक "unified BRICS currency" की गति को धीमा कर रहा है, ताकि उसके अपने Digital Rupee (e-₹) को अपनी स्वतंत्र cross-border infrastructure बनाने का पर्याप्त समय मिल सके |
🔴 BRICS Pay — SWIFT का एक Parallel Alternative
2026 में एक और बड़ा तकनीकी विकास हुआ है — BRICS Pay का operational launch, जो एक cross-border settlement platform है, जिसका मकसद SWIFT को bypass करना और dollar पर निर्भरता कम करना है।
| BRICS Pay में क्या Integrate हो रहा है | देश |
|---|---|
| CIPS | China का payment system |
| UPI | India का payment system — RBI इसके technical coordination का नेतृत्व कर रहा है |
| Pix | Brazil का payment system |
| SPFS | Russia का SWIFT-alternative |
महत्वपूर्ण बात यह है कि dollar अभी भी वैश्विक forex turnover के 88% हिस्से पर हावी है, लेकिन reserve currency के रूप में इसका हिस्सा 2000 में 70%+ से घटकर 2026 में 57% से नीचे आ चुका है यह एक क्रांति नहीं, बल्कि एक धीमा, क्रमिक (gradual) क्षरण (erosion) है।
🔴 Trump की धमकियां — कितनी असली, कितनी बयानबाज़ी
इस पूरी कहानी में एक बड़ा और लगातार मौजूद factor है — अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की बार-बार दी गई धमकियां।
| तारीख | धमकी |
|---|---|
| 30 जनवरी 2025 | Truth Social पर पोस्ट — "कोई मौका नहीं है कि BRICS अंतरराष्ट्रीय व्यापार में US Dollar की जगह लेगा... जो भी देश ऐसी कोशिश करेगा, उसे Tariffs को 'hello' कहना होगा, और America को 'goodbye'।" |
| Repeated Threats | कई बार 100% tariff लगाने की धमकी — अगर BRICS देश dollar को replace करने की कोशिश करें |
| 6 जुलाई 2025 | Truth Social पर — "जो भी देश BRICS की anti-American नीतियों के साथ खुद को जोड़ेगा, उस पर अतिरिक्त 10% tariff लगेगा, कोई अपवाद नहीं।" |
विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। Observer Research Foundation (ORF) के Harsh V. Pant के अनुसार — "भारत के लिए de-dollarise करने की कोई तार्किक आर्थिक, राजनीतिक, या रणनीतिक वजह नहीं है। हम अमेरिका के strategic partners हैं, dollar के इस्तेमाल से सहज हैं, और इससे फायदा उठाते आए हैं।" यानी Trump की धमकी भारत के लिए वैसे भी कोई बड़ा दबाव नहीं है, क्योंकि भारत पहले से ही formal de-dollarisation से दूर है।
कुछ विश्लेषक इन धमकियों को सिर्फ व्यापार वार्ता (trade negotiations) में एक बेहतर सौदा हासिल करने की रणनीति मानते हैं, न कि किसी ठोस नीति का संकेत।
रूस और चीन का रुख — भारत से बिल्कुल अलग
| देश | De-Dollarisation को लेकर रुख |
|---|---|
| रूस | सबसे ज़्यादा उत्साही — यह उनके लिए आर्थिक संप्रभुता (sovereignty) और पश्चिमी sanctions से बचने का एक अस्तित्वगत (existential) मामला है। Russia के लगभग 90% BRICS deals अब non-dollar हैं |
| China | इससे सबसे ज़्यादा फायदा होने वाला देश — क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था इतनी बड़ी है कि उसकी मुद्रा (yuan/renminbi) एक विकल्प के रूप में सबसे मज़बूत दावेदार है। CIPS जैसे systems पहले से मौजूद हैं |
| भारत | सबसे सतर्क — formal de-dollarisation से इनकार, लेकिन practical, technology-driven अंतरराष्ट्रीयकरण (जैसे UPI, e-Rupee) की दिशा में सक्रिय |
| Brazil | एक "pioneer" — 2023 से ही Mercosur (दक्षिण अमेरिकी trade bloc) के भीतर de-dollarised settlement की वकालत कर रहा है |
भारत की असली समस्या — "Rupee Trap" जो Russia के साथ सामने आई
एक बेहद व्यावहारिक समस्या ने भारत के local-currency approach की सीमाओं को उजागर किया है। भारत रूस से भारी मात्रा में सामान (मुख्यतः crude oil) आयात करता है, लेकिन रूस को उतना निर्यात नहीं करता। इससे एक असंतुलन (imbalance) पैदा होता है — रूस के पास rupees का एक बड़ा surplus जमा हो जाता है, जिसे वह खर्च करने के लिए पर्याप्त भारतीय सामान नहीं खरीद पाता।
यह वह बुनियादी समस्या है जो local-currency trade को हमेशा जटिल बनाती है अगर व्यापार संतुलित (balanced) न हो, तो एक देश की मुद्रा में जमा हुआ पैसा "बेकार" (unusable) पड़ा रह जाता है। एक प्रस्तावित समाधान यह है कि भविष्य में एक gold या commodity-basket आधारित मुद्रा (जैसे "The Unit") इस असंतुलन को दूर कर सके।
भारत के लिए इसका आर्थिक मतलब — फायदे और जोखिम दोनों
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| संभावित फायदे | Transaction costs में कमी, दूसरे देशों के sanctions या दबाव से बेहतर सुरक्षा, रुपये की वैश्विक साख (credibility) में बढ़ोतरी, Digital Rupee को एक बड़ा global platform |
| संभावित जोखिम | अगर बहुत तेज़ी से dollar से दूरी बनाई जाए, तो US के साथ व्यापारिक रिश्तों में तनाव, Trump जैसी tariff धमकियों का सामना, और एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था में जल्दबाज़ी जो अभी technically और institutionally पूरी तरह तैयार नहीं |
| भारत की रणनीति का सार | फायदे उठाओ (local-currency deals, UPI expansion, digital rupee), लेकिन जोखिम से बचो (कोई bold, provocative common-currency move नहीं) — यानी एक calculated hedge, कोई ideological crusade नहीं |
निष्कर्ष — भारत "de-dollariser" नहीं, एक चतुर "balancer" है
De-Dollarisation की पूरी कहानी को अगर एक वाक्य में समेटना हो, तो वह यह होगा यह कोई एक-रात में होने वाली क्रांति नहीं, बल्कि एक धीमी, तकनीकी, और बेहद राजनीतिक रूप से जटिल प्रक्रिया है, जिसमें अलग-अलग देशों की बिल्कुल अलग-अलग प्रेरणाएं (motivations) हैं।
रूस के लिए यह survival का सवाल है, चीन के लिए यह अपनी आर्थिक ताकत को वैश्विक वित्तीय प्रभाव में बदलने का मौका है, और भारत के लिए यह न तो पूरी तरह अस्वीकार करने की चीज़ है, न ही पूरी तरह अपनाने की। मोदी सरकार और RBI ने एक बेहद सुविचारित (well-calibrated) रास्ता चुना है formal de-dollarisation या common currency से दूरी बनाए रखते हुए, UPI, Digital Rupee, और bilateral local-currency deals जैसे व्यावहारिक tools के ज़रिए रुपये को धीरे-धीरे मज़बूत करना।
यही वजह है कि Trump की tariff धमकियां भारत को उतना परेशान नहीं करतीं जितना वे रूस या चीन को करती हैं क्योंकि भारत ने कभी formally dollar को चुनौती देने का दावा ही नहीं किया। भारत का खेल कहीं ज़्यादा शांत, कहीं ज़्यादा व्यावहारिक, और लंबी अवधि में शायद कहीं ज़्यादा टिकाऊ है dollar से टकराव नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ, अपनी शर्तों पर, धीरे-धीरे अपनी जगह बनाना।
आप क्या सोचते हैं क्या भारत को de-dollarisation में और आक्रामक भूमिका निभानी चाहिए, या मौजूदा सतर्क approach ही सही रणनीति है? नीचे टिप्पणी में ज़रूर बताएं।
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स्रोत / Sources:
1. ClearTax — "De-Dollarization: Meaning, Countries, BRICS Role and Global Impact", April 29, 2026
2. Rio Times Online — "BRICS De-Dollarization: What Is Real in 2026"
3. Academic Jobs (Global News) — "BRICS 2026 Summit Prep: De-Dollarization Strategies", January 17, 2026
4. Modern Diplomacy — "RBI's Digital Currency Proposal for the BRICS 2026 Agenda", April 21, 2026
5. The P3 (Strategic Think Tank) — "De-Dollarization: A Strategic Future", January 20, 2026
6. Blockchain News — "The Great De-Dollarization Heist: How India Is Turning the BRICS 'Unit' Into a Digital Rupee Power Play", December 25, 2025
7. Informed Clearly (Geopolitics) — "BRICS Pay Goes Live: Architecture of a Dollar-Free Settlement System", June 5, 2026
8. Polyester Time — "BRICS De-Dollarisation Gains Momentum After Russia's Stark Dollar Warning", August 31, 2026
9. ThePrint — "Trump's rhetoric against BRICS currency doesn't worry India"
10. TRT World — "India assumes BRICS presidency amid tariff pressures", January 2, 2026
11. DD News — "'As a BRICS nation, they'll have 100 per cent tariff if...': US President Trump on de-dollarization"
12. Notes on Liberty — "Trump's warning to BRICS countries"
13. Rice IAS — "Global Push for De-Dollarization and India's Strategic Role", January 10, 2026
14. Modern Diplomacy — "BRICS Summit 2025, de-dollarisation and Trump's warnings", July 14, 2025
15. ScienceDirect — "Understanding BRICSIZATION through an economic geopolitical model"

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