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Digital Arrest Scam 2026: फर्जी पुलिस कॉल से कैसे बचें?

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

Digital Arrest Scam में फर्जी पुलिस वीडियो कॉल से साइबर ठगी और बचाव के तरीके

एक कॉल, एक वर्दी, और 14 करोड़ रुपये

दिल्ली के एक रिटायर्ड डॉक्टर दंपति के पास एक दिन फोन आता है। कॉल करने वाला खुद को पुलिस अफसर बताता है और कहता है कि उनके नाम पर एक पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें नशीला पदार्थ है। थोड़ी देर में कॉल एक वीडियो कॉल में बदल जाती है, जहां वर्दी पहने एक "CBI अधिकारी" बैठा है, पीछे थाने जैसा माहौल है, और वह कहता है कि आप "डिजिटल अरेस्ट" में हैं। इसके बाद जो हुआ, उसमें इस दंपति ने करीब 14 करोड़ रुपये गंवा दिए, जो अब तक सामने आए सबसे बड़े व्यक्तिगत नुकसानों में गिना जाता है।

यह कोई अनपढ़ या भोले इंसान की कहानी नहीं है। इस ठगी का शिकार डॉक्टर, कारोबारी, रिटायर्ड अफसर और बैंकर तक बने हैं। सुप्रीम कोर्ट इस ठगी को "चौंकाने वाला" बता चुका है और जुलाई 2026 की सुनवाई में अदालत ने इसे अलग अपराध के तौर पर कानून में शामिल करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। आज हम इसे सीधे-सीधे समझेंगे: ठगी कैसे होती है, लोग डर क्यों जाते हैं, कैसे पहचानें कि यह ठगी है, और अगर कॉल आ जाए या पैसे चले जाएं तो क्या करें।

सबसे पहले, डिजिटल अरेस्ट असल में है क्या

सबसे ज़रूरी बात यह है कि भारतीय कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने मार्च 2025 की अपनी एडवाइज़री में साफ लिखा है कि किसी भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट की कोई अवधारणा नहीं है। कोई भी पुलिस, CBI, ED या कस्टम अधिकारी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार नहीं कर सकता, न आपसे "जांच" के नाम पर पैसे मंगवा सकता है। यह शब्द ठगों ने खुद गढ़ा है, ताकि सामने वाला यह मान ले कि वह सचमुच कानून की गिरफ्त में है।

ठग क्या कहते हैं सच्चाई क्या है
"आप डिजिटल अरेस्ट में हैं" कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, यह सिर्फ डराने का शब्द है
"वीडियो कॉल पर बने रहिए, कॉल मत काटिए" असली पुलिस आपको घंटों वीडियो कॉल पर बैठाकर नहीं रखती
"जांच के लिए पैसे सुरक्षित खाते में डालिए" कोई सरकारी एजेंसी "सेफ अकाउंट" में पैसे नहीं मंगवाती, वह खाता ठगों का होता है
"किसी को बताया तो गिरफ्तारी होगी" किसी वैध जांच में परिवार या वकील से बात करने से रोका नहीं जाता

ठगी कैसे होती है, चरण दर चरण

ज़्यादातर मामलों में ठगी एक तय पटकथा की तरह चलती है, जिसमें हर चरण पिछले चरण का भरोसा बढ़ाता है।

चरण क्या होता है
1. पहली कॉल कोई खुद को कूरियर कंपनी, टेलीकॉम या कस्टम का कर्मचारी बताता है और कहता है कि आपके नाम पर पार्सल, सिम या आधार का दुरुपयोग हुआ है
2. "पुलिस" को ट्रांसफर कॉल एक तथाकथित पुलिस अधिकारी को जोड़ दी जाती है, जो मुंबई, दिल्ली या किसी बड़े शहर के थाने का नाम लेता है
3. वीडियो कॉल Skype या WhatsApp पर वर्दी, थाने जैसा बैकग्राउंड, फर्जी आईडी कार्ड और कभी-कभी नकली अदालत जैसा माहौल दिखाया जाता है
4. फर्जी दस्तावेज़ फर्जी FIR, गिरफ्तारी वारंट या अदालत के आदेश की तस्वीरें भेजी जाती हैं
5. अलग-थलग करना पीड़ित को कॉल पर बनाए रखा जाता है और किसी से बात करने से रोका जाता है, कभी-कभी कई घंटों या दिनों तक
6. पैसे की मांग "जांच" या "सत्यापन" के नाम पर पैसे एक खास खाते में ट्रांसफर करवाए जाते हैं, और वादा किया जाता है कि जांच के बाद लौटा दिए जाएंगे

मामलों में कई बार असली जैसे नाम और कड़ियां भी जोड़ी जाती हैं। मैंगलुरु की एक महिला को पहले "मुंबई के एक थाने के सब-इंस्पेक्टर" ने कॉल किया, फिर एक "CBI अधिकारी" ने बताया कि एक चर्चित मामले की छापेमारी में उनके नाम का ATM कार्ड मिला है और उनके खाते में दो करोड़ रुपये जमा हैं। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 50 लाख रुपये ठग लिए गए। गुजरात में एक व्यक्ति को ठगों ने 13 घंटे तक "डिजिटल कस्टडी" में रखा।

डर पैदा करने की तकनीक

यह ठगी तकनीक से ज़्यादा इंसानी मनोविज्ञान पर चलती है। ठग जानते हैं कि डर में इंसान तर्क करना बंद कर देता है, इसलिए वे हर कदम पर दिमाग को सोचने का मौका ही नहीं देते।

तकनीक कैसे इस्तेमाल होती है दिमाग पर असर
अधिकार का दबाव वर्दी, थाने का सेटअप, सरकारी भाषा, बड़े पदों के नाम इंसान वर्दी वाले पर सवाल उठाने से हिचकता है
जल्दबाज़ी "अभी के अभी" या "एक घंटे में" फैसला करने का दबाव सोचने और किसी से पूछने का समय खत्म हो जाता है
गिरफ्तारी और बदनामी का डर ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग जैसे गंभीर आरोप इज़्ज़त और परिवार का डर तर्क पर भारी पड़ता है
गोपनीयता की शर्त "यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, किसी को मत बताना" इंसान अकेला पड़ जाता है और कोई रोकने वाला नहीं बचता
निजी जानकारी का इस्तेमाल नाम, पता, आधार या फोन नंबर जैसी सही जानकारी बताकर भरोसा जीतना इंसान मान लेता है कि सामने वाले के पास सच में मेरा रिकॉर्ड है

पढ़े-लिखे लोग क्यों फंस जाते हैं

पढ़ाई या समझदारी का इस ठगी से बचाव से सीधा रिश्ता नहीं है, और इसकी कुछ साफ वजहें हैं। पहली वजह यह है कि डर की हालत में दिमाग का "सोचने वाला" हिस्सा कमज़ोर पड़ जाता है और "बचने वाला" हिस्सा हावी हो जाता है, इसलिए व्यक्ति सबसे आसान रास्ता यानी आदेश मानना चुन लेता है। दूसरी वजह यह है कि पढ़े-लिखे और नौकरीपेशा लोगों को अपनी साख और इज़्ज़त की ज़्यादा फिक्र होती है, इसलिए थाने, केस और खबरों का नाम सुनते ही वे घबरा जाते हैं।

तीसरी वजह यह है कि ठग अब पुराने तरीके की कच्ची कॉल नहीं करते। वे असली जैसे बैकग्राउंड, फर्जी दस्तावेज़, सही व्यक्तिगत जानकारी और पीड़ित को कई घंटे अकेला रखने की रणनीति इस्तेमाल करते हैं। चौथी वजह शर्म है, कई लोग पैसे गंवाने के बाद भी शिकायत करने में देरी कर देते हैं, जबकि इसी देरी में पैसा आगे खातों में घूमकर गायब हो जाता है।

आंकड़े क्या कहते हैं

इस ठगी पर आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग मिलते हैं, क्योंकि कई मामले दर्ज ही नहीं होते और अवधियां अलग-अलग गिनी जाती हैं। इसलिए इन्हें अनुमान की तरह पढ़ना ठीक रहेगा।

आंकड़ा विवरण
सुप्रीम कोर्ट का अनुमान डिजिटल अरेस्ट ठगी में करीब 3,000 करोड़ रुपये की ठगी, जिसे अदालत ने "चौंकाने वाला" बताया
2022 से मई 2026 तक रिपोर्टों के अनुसार करीब 2.98 लाख शिकायतें और लगभग 4,057 करोड़ रुपये का नुकसान
2024 (सबसे ज़्यादा शिकायतों वाला साल) करीब 1.24 लाख शिकायतें दर्ज
2026 के पहले पांच महीने करीब 15,000 शिकायतें दर्ज
छह साल में कुल साइबर ठगी I4C के आंकड़ों के हवाले से करीब 53,000 करोड़ रुपये
CBI की जांच सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि CBI करीब 20 बड़े मामलों की जांच कर रही है, जिनमें हर एक में 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ

ठगी के संकेत, जिन्हें पहचानना ज़रूरी है

  • कॉल आते ही गिरफ्तारी, केस, पार्सल में ड्रग्स या आधार के गलत इस्तेमाल की बात, और तुरंत "पुलिस" से जोड़ देना
  • वीडियो कॉल पर बने रहने का दबाव और कॉल काटने पर "ज़्यादा गंभीर कार्रवाई" की धमकी
  • किसी को न बताने की शर्त, परिवार या वकील से बात करने से रोकना
  • "जांच", "वेरिफिकेशन" या "सेफ अकाउंट" के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने की मांग
  • भारतीय जैसे दिखने वाले नंबर, जो असल में विदेश से स्पूफ किए गए हों
  • फोटो में भेजे गए आधिकारिक दिखने वाले नोटिस, जिनमें भाषा या फॉर्मेट अजीब हो

अगर ऐसी कॉल आ जाए तो क्या करें

क्या करें क्यों
कॉल तुरंत काट दें असली अधिकारी आपको कॉल पर रोके नहीं रखते, कॉल काटने से कोई कानूनी नुकसान नहीं होता
किसी परिवार वाले से तुरंत बात करें अलग-थलग करना ही ठगी की सबसे बड़ी चाल है, बाहर की एक राय पूरा खेल बिगाड़ देती है
पैसे या OTP किसी को न दें कोई जांच एजेंसी पैसे मंगवाकर "सत्यापन" नहीं करती
खुद थाने या एजेंसी से पुष्टि करें कॉल करने वाले का दिया नंबर नहीं, खुद ढूंढे हुए आधिकारिक नंबर पर बात करें
नंबर और बातचीत का रिकॉर्ड रखें स्क्रीनशॉट, कॉल लॉग और भेजे गए दस्तावेज़ शिकायत में सबूत बनते हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने "मन की बात" कार्यक्रम में इसी तरह की कॉल से सावधान रहने के लिए "रुको, सोचो और फिर कदम उठाओ" का मंत्र दिया था, जो इस ठगी से बचने की सबसे सरल कसौटी है।

अगर पैसे चले गए तो शिकायत कैसे करें

इस मामले में सबसे बड़ी भूमिका समय की होती है, क्योंकि ठग पैसा कई खातों में तेज़ी से घुमा देते हैं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा बैंक में रोके जाने की संभावना उतनी ज़्यादा रहेगी।

कदम क्या करना है
1. तुरंत 1930 पर कॉल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 चौबीसों घंटे चालू रहती है, इसे बिना देर के कॉल करें, खासकर पहले 24 घंटे के भीतर
2. ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और ट्रांज़ैक्शन की पूरी जानकारी डालें
3. बैंक को बताएं अपने बैंक की हेल्पलाइन पर तुरंत सूचना दें, ताकि जिस खाते में पैसा गया है उसे रोकने की प्रक्रिया शुरू हो सके
4. स्थानीय पुलिस में FIR नज़दीकी थाने या साइबर थाने में लिखित शिकायत और FIR दर्ज करवाएं
5. संदिग्ध नंबर की रिपोर्ट संचार साथी पोर्टल की "चक्षु" सुविधा पर संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट करें
6. सबूत सहेजें UTR नंबर, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ों की तस्वीरें सुरक्षित रखें

शिकायत में शर्म न करें। इस ठगी में पुलिस, बैंकर और बड़े कारोबारी तक फंसे हैं, और ठगों की रणनीति ही ऐसी बनाई गई है कि कोई भी घबरा जाए। रिपोर्ट करना सिर्फ अपना पैसा बचाने के लिए नहीं, बल्कि उस खाते और नेटवर्क को पकड़वाने के लिए भी ज़रूरी है, ताकि अगला व्यक्ति न फंसे।

सरकार और सुप्रीम कोर्ट क्या कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट ने इस ठगी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने CBI को देशव्यापी जांच का निर्देश दिया, बैंकों और दूरसंचार कंपनियों से सहयोग करने को कहा, ठगों से जुड़े बैंक खाते रोकने पर ज़ोर दिया और यह भी पूछा कि संदिग्ध लेनदेन पकड़ने में AI और मशीन लर्निंग जैसे उपकरणों का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा। जुलाई 2026 की सुनवाई में अदालत ने केंद्र से डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध के रूप में कानून में शामिल करने और डीपफेक के लिए अलग कानून बनाने की बात उठाई।

एक व्यावहारिक कमी भी बार-बार सामने आती है, यानी ठगों का पैसा "म्यूल अकाउंट" यानी किराये पर लिए या हड़पे गए बैंक खातों से गुज़रता है, और पैसे तेज़ी से घूमते हैं जबकि खाते रोकने के आदेश सरकारी रफ़्तार से चलते हैं। इसी वजह से जानकार बैंकों की ज़िम्मेदारी तय करने और शिकायत मिलते ही खाते तुरंत रोकने की व्यवस्था मज़बूत करने की मांग करते रहे हैं। उधर 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के ज़रिए अब तक करोड़ों रुपये ठगी में जाने से बचाए भी गए हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट की कहानी हमें यह सिखाती है कि आज की ठगी तकनीक से ज़्यादा डर, दबाव और अकेलेपन पर खेलती है। इसीलिए इससे बचने की सबसे बड़ी ढाल कोई सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि एक सीधा नियम है: असली पुलिस कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती और कभी पैसे नहीं मंगवाती। अगर कभी ऐसी कॉल आए, तो कॉल काटें, किसी अपने से बात करें और 1930 पर कॉल करें।

यह लेख अपने घर के बुज़ुर्गों और माता-पिता तक ज़रूर पहुंचाइए, क्योंकि सबसे ज़्यादा निशाना वही बनते हैं और वही सबसे ज़्यादा शर्म की वजह से चुप भी रह जाते हैं। एक अकेली चेतावनी किसी के जीवन भर की बचत बचा सकती है।

क्या आपके या आपके किसी जानने वाले के पास कभी ऐसी कॉल आई है? नीचे टिप्पणी में अपना अनुभव ज़रूर बताएं, ताकि दूसरे लोग सतर्क हो सकें।

स्रोत / Sources:

1. Wikipedia, "Digital arrest scam"
2. TechTimes, "India Supreme Court Demands Criminal Law for Digital Arrest, Deepfake Fraud", July 29, 2026
3. IndiaTomorrow, "The Myth of 'Digital Arrest' and the Rising Menace of Cyber Fraud", January 28, 2026
4. News4Hackers, "Cyber Scams in India Cost ₹4,057 Crore in Four Years: Latest Scam Trends"
5. The Hans India, "The Rs 3,000-cr swindle: How 'digital arrests' paralyze the gullible"
6. Right to Information Wiki, "Digital Arrest Scam in India: Spot, Stop, Recover Money"
7. ScamWatchHQ, "India Scams 2026: Fake Cops, Deepfake Tycoons, and the ₹22,500-Crore Fraud Epidemic"
8. Deccan Herald, "Another digital arrest case: Karnataka woman loses Rs 50 lakh to fraudsters posing as police, CBI officials"
9. The Tribune, "Gujarat man held in digital custody for 13 hours, duped of Rs 13 lakh"
10. Hindustan Times, "Digital arrests: Inside India's scariest scam, and how to stop it"

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