BRICS Business Forum: Putin बोले हम G7 से बड़े — पूरा विश्लेषण
लेखक: आकाश दीप | युगबोध
एक शाम, तीन महाशक्तियां, और एक वाक्य जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा
11 सितंबर 2026 की शाम। भारत मंडपम, नई दिल्ली। यहां हो रहे BRICS Business Forum की Leaders' Session में, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन माइक के सामने आए, तो उन्होंने एक ऐसा वाक्य बोला जो अगले 24 घंटों में दुनियाभर की सुर्खियां बन गया "G7 दुनिया की वैश्विक अर्थव्यवस्था का सिर्फ 18% हिस्सा है, जबकि BRICS अब 40% से ज़्यादा है।"
यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था यह एक भू-राजनीतिक बयान था, जो उसी मंच से आया जहां अगले दिन, यानी 12-13 सितंबर को, 18वां BRICS Summit औपचारिक रूप से शुरू होने वाला था। और इस बयान के पीछे-पीछे, उसी शाम, कई और नेताओं ने अपनी-अपनी बात रखी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने "Make in India, Innovate with India, Scale for the World" के मंत्र के साथ, ईरान के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की अपील के साथ, और साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति ने Global South की आवाज़ बुलंद करते हुए।
आज हम इस पूरी शाम को हर नेता के बयान को, हर आंकड़े को, और इसके पीछे छिपी भू-राजनीति (geopolitics) को विस्तार से समझेंगे। यह सिर्फ एक business forum नहीं था यह अमेरिका को एक सीधा संदेश, ईरान की उपस्थिति का एक बड़ा भू-राजनीतिक अर्थ, और भारत की एक बेहद सधी हुई कूटनीतिक चाल थी।
BRICS Business Forum — एक नज़र में
| Key Facts | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 11 सितंबर 2026, शाम (Summit से एक दिन पहले) |
| Venue | भारत मंडपम, नई दिल्ली (Pragati Maidan) |
| आकार | अब तक का सबसे बड़ा BRICS Business Forum — 2,000+ business leaders और delegates |
| मौजूद नेता | PM Narendra Modi (भारत), President Vladimir Putin (रूस), President Masoud Pezeshkian (ईरान), President Cyril Ramaphosa (साउथ अफ्रीका) |
| BRICS के कुल सदस्य (2026) | 11 देश — Brazil, Russia, India, China, South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran, Indonesia, Saudi Arabia, UAE |
| BRICS की वैश्विक हिस्सेदारी | दुनिया की 49.5% आबादी, 40% GDP, 26% वैश्विक व्यापार |
🔴 पुतिन का बयान — पूरी बात, पूरा संदर्भ
पुतिन का बयान सिर्फ एक तुलना नहीं था — यह पिछले पांच साल के ट्रेंड को आधार बनाकर दिया गया एक structured argument था।
| पुतिन के आंकड़े | विवरण |
|---|---|
| BRICS का Global GDP Share | 40% से ज़्यादा (पिछले 5 साल के औसत आधार पर) |
| G7 का Global GDP Share | सिर्फ 18-29% (अलग-अलग रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर — कुछ में 18%, कुछ में 29% बताया गया) |
| पिछले 5 साल में Global Growth में योगदान | पुतिन के अनुसार, BRICS ने आधे से ज़्यादा वैश्विक आर्थिक वृद्धि को driven किया, जबकि G7 का हिस्सा सिर्फ 18% रहा |
| पश्चिम पर सीधा आरोप | "पश्चिमी प्रतिद्वंद्वी (Western competitors) अपना पुराना नेतृत्व फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, और यह संघर्ष सरकारी स्तर पर एक अशोभनीय (unseemly) मोड़ ले रहा है" |
| Sanctions पर टिप्पणी | पश्चिमी प्रतिबंध (Western sanctions) को "अन्यायपूर्ण (unjust)" बताया, और कहा कि मॉस्को ने trade curbs के बावजूद अपनी financial momentum बरकरार रखी है |
पुतिन ने यह भी जोड़ा कि BRICS देश दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, और यही वजह है कि उनके पास "बड़ा, गतिशील, जीवंत घरेलू बाज़ार (dynamic, vibrant domestic markets)" है — यानी BRICS की ताकत सिर्फ export-driven नहीं, बल्कि अपने ही अंदर एक विशाल उपभोक्ता आधार (consumer base) पर टिकी हुई है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि यह कोई नई बात नहीं थी पुतिन इसी तरह की GDP तुलना पहले भी St. Petersburg forum (जून 2026) और BRICS के 2025 summit में कर चुके थे। लेकिन इस बार यह बयान भारतीय ज़मीन पर, भारत के अपने chairship year में दिया गया जिससे इसका वज़न और भी बढ़ गया।
🔴 प्रधानमंत्री मोदी का भाषण — पूरा विश्लेषण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के लिए एक बेहद व्यावहारिक (practical), कम-अमूर्त (least abstract) विषय चुना — समुद्री मार्गों की सुरक्षा।
समुद्री मार्ग सुरक्षा क्यों यह सिर्फ कूटनीतिक बयान नहीं
मोदी ने कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग (secure sea lanes), खुले आपूर्ति मार्ग (open supply routes), और नाविकों (seafarers) की सुरक्षा यह सब वैश्विक व्यापार के आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी शर्तें हैं, और भारत "freedom of navigation" (नौवहन की स्वतंत्रता) का दृढ़ समर्थक है।
यह बयान भावुक कूटनीतिक शब्दजाल नहीं है इसके पीछे ठोस आर्थिक वास्तविकता है। भारत अपने व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से करता है, और दुनिया के व्यापारिक जहाज़ी बेड़े (merchant crew) का एक बड़ा हिस्सा भारतीय नाविकों से भरा है। यानी यह Goa, Kerala और Maharashtra जैसे राज्यों में घर भेजी जाने वाली तनख्वाहों (wages sent home) के बारे में एक सीधा बयान है।
मोदी के दिए गए आंकड़े
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| भारत के FTAs | 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ Free Trade Agreements |
| BRICS की आबादी हिस्सेदारी | दुनिया की 50% आबादी |
| BRICS का Global GDP Share | 40% |
| BRICS का Global Trade Share | 25% से ज़्यादा |
| पिछले 2 दशकों में World GDP Growth | लगभग 2.5 गुना |
| पिछले 2 दशकों में BRICS का Combined GDP Growth | लगभग 4.5 गुना — यानी दुनिया की औसत रफ़्तार से करीब दोगुनी |
तीन शब्दों में मोदी की रणनीति — "Make, Innovate, Scale"
मोदी ने अपने भाषण को तीन सीधे निर्देशों (instructions) में समेटा "Make in India, Innovate with India, Scale for the World।" यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक क्रम (sequence) है पहले भारत में उत्पादन, फिर भारत के साथ मिलकर नवाचार, और फिर उसे पूरी दुनिया के पैमाने पर ले जाना।
छोटे व्यवसायों के लिए तीन ठोस उपकरण
मोदी ने भारत की chairship के दौरान बनाए गए तीन बेहद व्यावहारिक tools का ज़िक्र किया, जो सीधे छोटे व्यवसायों (small firms) को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं:
- BRICS Incubator Network — startups के लिए cross-border support
- BRICS MSME Cooperation Portal — छोटे-मंझोले उद्योगों के लिए
- BRICS Startup Innovation Fund — नए विचारों को funding
इसका असली मतलब एक उदाहरण से समझें Coimbatore के किसी pump बनाने वाले व्यवसायी के पास Jakarta में एक खरीदार तो हो सकता है, लेकिन उसके पास अक्सर सही registration route और shipping period तक टिकने वाली credit line की कमी होती है। यह तीनों उपकरण ठीक इसी अंतर को भरने के लिए बनाए गए हैं।
🔴 ईरान का बयान — De-Dollarisation की सबसे मुखर आवाज़
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस मंच से एक बेहद स्पष्ट, सीधा प्रस्ताव रखा BRICS के भीतर आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं (national currencies) के व्यापक इस्तेमाल पर ज़ोर, साथ ही मुद्रा जोखिम (currency risk) को प्रबंधित करने के लिए उपकरण (instruments) भी होने चाहिए।
यह बयान bilateral meeting में भी दोहराया गया जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति के साथ अलग से मुलाकात की, तो उसमें भी West Asia के हालात और seafarers (नाविकों) की सुरक्षा पर चर्चा हुई। मोदी ने वहां भी freedom of navigation and commerce (नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता) पर ज़ोर दिया यानी यह theme सिर्फ business forum तक सीमित नहीं रहा, बल्कि bilateral diplomacy में भी दोहराया गया।
ईरान की मौजूदगी का असली भू-राजनीतिक अर्थ
यहां एक बेहद महत्वपूर्ण संदर्भ (context) समझना ज़रूरी है। यह वह दौर है जब अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान का तनाव चरम पर है। ऐसे माहौल में, ईरान का इस मंच पर होना और खुलकर de-dollarisation की वकालत करना यह एक तरह से यह दिखाने की कोशिश है कि पश्चिमी दबाव और प्रतिबंधों (sanctions) के बावजूद, ईरान के पास वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मंच और साझेदार मौजूद हैं।
Quincy Institute के Global South Program के Director Sarang Shidore ने इसे एक दिलचस्प तरीके से समझाया उन्होंने BRICS को "एक dysfunctional family" बताया, और कहा कि इसके भीतर मतभेद सबसे साफ तौर पर सुरक्षा मुद्दों पर सामने आते हैं जैसे कि ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं, जबकि दोनों Middle East के युद्ध में विपरीत पक्षों पर खड़े हैं। यानी BRICS एक ऐसा मंच है जहां आर्थिक हित सबको जोड़ते हैं, लेकिन भू-राजनीतिक हित अक्सर एक-दूसरे से टकराते भी हैं।
दक्षिण अफ्रीका का बयान — Global South का नेतृत्व
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति Cyril Ramaphosa ने एक अलग, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण बिंदु उठाया उन्होंने कहा कि "Global South को manufacturing, technology, और value creation में नेतृत्व करना चाहिए।" उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों (unilateral sanctions) पर भी चिंता जताई जो सीधे तौर पर पश्चिमी देशों की उस नीति की आलोचना है, जिसके तहत बिना किसी बहुपक्षीय (multilateral) सहमति के, एकतरफा फैसले से किसी देश या समूह पर प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं।
🔴 वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के आंकड़े — व्यापार की असली कहानी
इसी session में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने एक ऐसा आंकड़ा पेश किया जो BRICS की आर्थिक यात्रा को एक नई दृष्टि से समझाता है।
| BRICS Exports — 21 साल की कहानी | आंकड़ा |
|---|---|
| 2003 में BRICS Exports | लगभग $900 अरब |
| 2024 में BRICS Exports | $6 ट्रिलियन |
| कुल वृद्धि | 6.67 गुना — जो लगभग 9.45% की compound annual growth rate (CAGR) के बराबर बैठती है |
गोयल ने यह भी बताया कि भारत की chairship का मकसद रहा है सदस्य देशों के बीच ज़्यादा संतुलित व्यापार (balanced trade), और Services Trade का विस्तार। उन्होंने कहा कि यह सहयोग किसानों, महिला उद्यमियों, युवा entrepreneurs, और MSMEs तक पहुंचना चाहिए क्योंकि यही वर्ग BRICS अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ है।
यह भी बताया गया कि यह अब तक का सबसे बड़ा BRICS Business Forum था 2,000 से ज़्यादा business leaders और delegates के साथ।
🔴 सबसे बड़ा सवाल — यह सब America के लिए क्या संदेश है
यह वह हिस्सा है जहां असली भू-राजनीति (geopolitics) खुलकर सामने आती है। यह पूरा forum एक ऐसे माहौल में हो रहा है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही कई बार BRICS को de-dollarisation को लेकर सीधी धमकियां दे चुके हैं।
Trump की पुरानी धमकियों की timeline
| तारीख | Trump का बयान |
|---|---|
| 30 नवंबर 2024 | "हमें इन देशों से एक commitment चाहिए कि वे न तो कोई नई BRICS मुद्रा बनाएंगे, न ही किसी और मुद्रा को इतना ताकतवर डॉलर की जगह लेने के लिए support करेंगे — वरना उन्हें 100% Tariffs का सामना करना पड़ेगा, और अमेरिका के शानदार बाज़ार को अलविदा कहना पड़ेगा।" |
| 30 जनवरी 2025 | "वे कोई दूसरा 'sucker nation' ढूंढ लें। इस बात का कोई मौका नहीं कि BRICS अंतरराष्ट्रीय व्यापार में US Dollar की जगह लेगा। जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा, उसे Tariffs को 'hello' कहना होगा, और America को 'goodbye'।" |
| 2026 में जारी रुख | Trump ने de-dollarisation के खिलाफ अपना रुख जारी रखा है — जो सीधे तौर पर इस BRICS Summit के समय पर भी एक background दबाव बनाए हुए है |
इस पूरे संदर्भ में, इस forum में दिए गए बयानों को दो हिस्सों में बांटकर समझा जा सकता है — एक तरफ पुतिन और ईरान जैसे देश, जो dollar-dominance को सीधी चुनौती देने की भाषा बोलते हैं। दूसरी तरफ भारत, जो बेहद संतुलित (calibrated) भाषा में बात करता है।
भारत की सधी हुई भाषा — Dollar को सीधी चुनौती नहीं
गौर करने वाली बात है कि मोदी के भाषण में कहीं भी सीधे तौर पर "dollar" या "de-dollarisation" शब्द का ज़िक्र नहीं आया। इसके बजाय, मोदी ने बात की trade barriers कम करने, economic bridges बनाने, freedom of navigation, और startups के लिए concrete tools बनाने की। यह वही रणनीति है जिसका ज़िक्र हमने अपने पिछले "De-Dollarisation में भारत का रोल" वाले article में किया था भारत dollar को सीधे चुनौती देने से बचता है, बल्कि practical, technology-driven tools (जैसे UPI का विस्तार) पर ज़ोर देता है।
इसी संदर्भ में, 8 सितंबर 2026 को यानी Summit से ठीक पहले रूस के Kremlin प्रवक्ता Dmitry Peskov ने भी स्पष्ट किया कि रूस "de-dollarisation" की कोई नीति नहीं अपना रहा, और भुगतान के किसी भी स्वीकार्य रूप (acceptable form of payment) के लिए खुला है। यह बयान भी उसी सतर्क, गैर-टकरावपूर्ण (non-confrontational) भाषा का हिस्सा लगता है, जिसे शायद आगामी Trump-tariff धमकियों को ध्यान में रखते हुए अपनाया गया।
🔴 iBRICS Summit — असली पैसा कहां जमा हो रहा है
Business Forum के अलावा, 12-13 सितंबर को एक समानांतर (parallel) आयोजन भी हो रहा है — पहला iBRICS Summit, जिसमें 500 से ज़्यादा institutional investors, वित्त मंत्री, और business leaders शामिल हो रहे हैं।
| iBRICS Summit — पैसे की असली तस्वीर | विवरण |
|---|---|
| Participants | 500+ sovereign wealth funds, pension funds, family offices |
| कुल Managed Wealth | लगभग $1 ट्रिलियन — यानी औसतन हर participant के पास करीब $2 अरब का managed wealth |
| मकसद | Sovereign capital को bankable infrastructure, energy, और digital projects से जोड़ना — 21 BRICS member और partner states में |
| प्रमुख चर्चा-विषय | Cross-border investment, non-dollar settlement, payment systems को जोड़ना — जिसमें भारत का UPI और Brazil का Pix शामिल है, साथ ही central bank digital currencies के बीच interoperability |
एक UPI-Pix link का असली मतलब क्या होगा इसे एक साधारण उदाहरण से समझें: São Paulo में पढ़ने वाला कोई भारतीय छात्र, Tiruppur के किसी garment exporter को भुगतान कर रहा कोई Brazilian खरीदार, या घर पैसा भेज रहा कोई नाविक इन सबको फिलहाल एक "correspondent-banking toll" चुकाना पड़ता है, जबकि दोनों देशों के घरेलू systems उस transaction को सेकंडों में settle कर सकते हैं। यही वह "असली," ज़मीनी फायदा है, जिसकी बात भारत बार-बार करता है dollar को हराने की भाषा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के transaction cost को कम करने की भाषा।
🔴 चीन का Factor — Xi Jinping की 7 साल बाद वापसी
इस पूरी तस्वीर में एक और बेहद महत्वपूर्ण किरदार है — चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping, जिनका इस Summit में आना अपने आप में एक बड़ी खबर है।
| Xi Jinping की भारत यात्रा — महत्व | विवरण |
|---|---|
| आखिरी भारत यात्रा कब थी | 7 साल पहले — यानी यह उनकी भारत की पहली यात्रा है इतने लंबे अंतराल के बाद |
| India-China Reset का हिस्सा | यह उस बड़े "India-China reset" का विस्तार है, जो हाल ही के महीनों में शुरू हुआ — पहले SCO Summit (Tianjin, सितंबर 2025) में मोदी, पुतिन और शी की मुलाकात, अब BRICS में इसकी अगली कड़ी |
| पहले क्या स्थिति थी | सिर्फ कुछ साल पहले, भारत China-नेतृत्व वाले SCO से दूरी बना रहा था — 2023 में एक low-key virtual summit की मेज़बानी की, और 2024 के summit में मोदी खुद अनुपस्थित रहे थे |
| Bishkek Declaration | हाल के SCO Summit में मोदी ने Xi और पुतिन के साथ मिलकर Bishkek Declaration पर हस्ताक्षर किए, जिसमें US-Israeli military attacks on Iran की निंदा की गई थी |
यह दिखाता है कि यह BRICS Summit सिर्फ एक आर्थिक मंच नहीं यह उस बड़ी भू-राजनीतिक तस्वीर का हिस्सा है, जहां भारत, अमेरिका के दबाव और tariff-नीतियों के जवाब में, धीरे-धीरे रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से संतुलित (rebalance) कर रहा है बिना पश्चिम के साथ अपने रिश्तों को पूरी तरह तोड़े।
🔴 भारत-रूस द्विपक्षीय बैठक — Thirukkural वाली Cultural Diplomacy
Business Forum से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 11 सितंबर की शाम को तीन अलग-अलग bilateral meetings कीं — पुतिन के साथ, ईरानी राष्ट्रपति के साथ, और UN Secretary-General António Guterres के साथ।
Modi-Putin Meeting की मुख्य बातें
- Politics, trade-economy, defence, energy, space, skill mobility, और people-to-people ties सभी विषयों पर समीक्षा
- West Asia और Black Sea क्षेत्र के संघर्षों पर विचारों का आदान-प्रदान मोदी ने दोहराया कि "dialogue और diplomacy ही आगे का रास्ता है," और भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है
- पुतिन ने मोदी को 24वें India-Russia Annual Summit के लिए रूस आने का न्योता दिया, जिसे मोदी ने स्वीकार किया
एक बेहद प्रतीकात्मक (symbolic) पल भी इस मुलाकात में आया — मोदी ने पुतिन को Thirukkural (तमिल क्लासिक ग्रंथ, जो 2,000 साल पुराना है) का एक रूसी अनुवाद भेंट किया, जिसे Central Institute of Classical Tamil ने प्रकाशित किया था। एक 2000 साल पुराने तमिल ग्रंथ का रूसी अनुवाद, एक भारतीय संस्थान द्वारा किया गया, और एक summit में सौंपा गया — यह "cultural diplomacy done with something India actually owns" का एक बेहतरीन उदाहरण है, जैसा एक रिपोर्ट में कहा गया।
Guterres के साथ मुलाकात
UN Secretary-General के साथ बातचीत में global conflicts, freedom of navigation, sustainable development, renewable energy, global food security, और human-centric artificial intelligence, साथ ही Security Council सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सुधार (reform) पर चर्चा हुई। Guterres ने भारत की चौथी बार BRICS chairship संभालने पर बधाई भी दी।
एक विश्लेषक की टिप्पणी इस पूरी शाम की अहमियत को बखूबी समझाती है "भारत को इस तरह की एक शाम से जो हासिल होता है, वह एक खास तरह की हैसियत है: Moscow, Tehran, और United Nations से एक ही दिन में, एक ही इमारत में बातचीत करने की क्षमता, बिना किसी एक को दूसरे से बात न करने का बहाना बनाए।"
भारत को इस पूरे Summit से क्या ठोस फायदा मिल रहा है
अपनी chairship के दौरान, भारत ने सिर्फ बड़े बयान नहीं दिए — बल्कि कुछ बेहद ठोस, तकनीकी उपकरण (technical instruments) भी तैयार किए।
| Instrument | व्यावहारिक फायदा |
|---|---|
| Customs Cooperation Agreement | सिद्धांत रूप से approved — इसका मतलब है 9 दिन की clearance को घटाकर 3 दिन तक लाना |
| Standardisation Memorandum | 11 राष्ट्रीय standards bodies द्वारा हस्ताक्षरित — इसका मतलब है कि एक भारतीय दवा की खेप (pharmaceutical consignment) Addis Ababa के बंदरगाह पर बिना अटके clear हो सकेगी |
| कुल बैठकें (chairship year में) | 350+ meetings, 25 शहरों में |
| यह भारत की कौन-सी Chairship है | चौथी — पहले 2012 (Delhi Declaration से New Development Bank का प्रस्ताव), 2016 (Goa — आतंकवाद पर भाषा तय हुई), और 2021 (virtual summit — counter-terrorism plan) |
एक विश्लेषण यह भी बताता है कि भारत के लिए असली फायदा "prestige से कहीं ज़्यादा संकुचित (narrower) लेकिन ज़्यादा उपयोगी" है क्योंकि यही unglamorous instruments (customs agreements, standards memoranda) हैं, जिन पर export earnings असल में निर्भर करती हैं।
एक निष्पक्ष सवाल — क्या BRICS वाकई एकजुट है, या सिर्फ आर्थिक हितों से बंधा एक ढीला गठबंधन
एक ईमानदार geopolitical विश्लेषण के लिए यह सवाल पूछना ज़रूरी है। जैसा Sarang Shidore ने बताया, BRICS के भीतर मतभेद सुरक्षा मुद्दों पर सबसे साफ नज़र आते हैं ईरान और UAE, दोनों BRICS सदस्य हैं, लेकिन Middle East के युद्ध में विपरीत पक्षों पर हैं।
इसी तरह, de-dollarisation को लेकर भी सदस्य देशों में मतभेद है रूस और ईरान इसे लेकर ज़्यादा मुखर (vocal) हैं, जबकि भारत सतर्क रुख अपनाता है, और खुद रूस भी (Peskov के बयान के अनुसार) औपचारिक रूप से "de-dollarisation की नीति" से इनकार कर चुका है। यह दिखाता है कि BRICS एक monolithic (एकाश्म) गुट नहीं है यह अलग-अलग, कभी-कभी परस्पर-विरोधी राष्ट्रीय हितों वाले 11 देशों का एक जटिल गठबंधन है, जो सिर्फ इस एक बात पर एकमत है कि पश्चिम-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था में उन्हें ज़्यादा आवाज़ चाहिए।
निष्कर्ष — एक शाम जिसने कई संदेश एक साथ भेजे
11 सितंबर 2026 की वह शाम, भारत मंडपम में, सिर्फ एक business forum नहीं थी यह कई अलग-अलग संदेशों का एक साथ प्रसारण (simultaneous broadcast) था। पुतिन ने पश्चिम को बताया कि BRICS की आर्थिक ताकत अब G7 से आगे निकल चुकी है। ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के दबाव के बावजूद अपनी वैश्विक साझेदारी दिखाई। मोदी ने बेहद संतुलित भाषा में बिना dollar को सीधी चुनौती दिए भारत के व्यावहारिक, business-friendly दृष्टिकोण को पेश किया। और चीन के राष्ट्रपति की 7 साल बाद वापसी ने भारत-चीन-रूस के त्रिकोण में एक नए संतुलन का संकेत दिया।
America के लिए इस पूरे मंच से जो संदेश गया, वह शायद यह है Trump की tariff धमकियों के बावजूद, BRICS देश अपनी आर्थिक साझेदारी और वैकल्पिक payment infrastructure (UPI-Pix linkage जैसी पहलों) पर आगे बढ़ते रहेंगे, भले ही यह गति टकरावपूर्ण (confrontational) होने के बजाय क्रमिक (gradual) और व्यावहारिक (pragmatic) बनी रहे। और भारत, इस पूरे खेल में, अपनी एक बेहद खास भूमिका निभा रहा है न तो पूरी तरह पश्चिम के साथ, न पूरी तरह उसके खिलाफ, बल्कि एक ऐसी जगह पर खड़ा, जहां से वह Moscow, Tehran, Washington, और United Nations सभी के साथ एक साथ बातचीत कर सकता है।
आप क्या सोचते हैं — क्या BRICS वाकई G7 को चुनौती दे पाएगा, या यह सिर्फ आर्थिक हितों से बंधा एक ढीला, अस्थायी गठबंधन बना रहेगा? नीचे टिप्पणी में ज़रूर बताएं।
➡ BRICS Summit 2026 नई दिल्ली — पूरी जानकारी, सदस्य देश और महत्व
➡ De-Dollarisation क्या है? भारत और मोदी का असली रोल समझिए
स्रोत / Sources:
1. Outlook India — "Putin Takes Swipe At G7 Over Shrinking Global Output, Hails BRICS Economic Might At New Delhi Summit", September 11, 2026
2. NewsGate — "BRICS is bigger, not G-7: Putin", September 12, 2026
3. PGurus — "BRICS Now Bigger Than G7, Accounts For 40 Percent Of World GDP: Putin", September 11, 2026
4. Blitz India Media — "India BRICS Summit 2026: Trade, Investment, UPI, Fintech and Global Cooperation", September 12, 2026
5. CNBC — "Xi, Putin and Modi meet at BRICS summit amid Trump pressure", September 12, 2026
6. Chatham House — "The India–China reset will continue at the BRICS summit"
7. UPI.com — "Modi hosts leaders of Russia, Iran and China at BRICS summit", September 11, 2026
8. Outlook India — "'How Trump Is Destroying US Dollar': Former Finance Secretary Subhash Chandra Garg on BRICS' Shift Towards China's Yuan"
9. Wikipedia — "18th BRICS summit"
10. Press Information Bureau (PIB) — BRICS Research Backgrounder, September 10, 2026
11. Notes on Liberty — "Trump's warning to BRICS countries"

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