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Semicon 2.0: सरकार ने Chip Policy क्यों बदली, पूरा सच

लेखक: आकाश दीप | युगबोध

India Semiconductor Mission 2.0 की नई Chip Policy को दर्शाता इन्फोग्राफिक, Fab और ATMP के बीच बंटी सरकारी सहायता

पांच साल की योजना अचानक बारह साल की क्यों हो गई, और सरकार ने अपनी ही चार साल पुरानी नीति को दोबारा क्यों लिखा

जुलाई 2026 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने भारत की पूरी चिप-निर्माण रणनीति को नए सिरे से परिभाषित कर दिया। यह फैसला था India Semiconductor Mission 2.0, जिसे संक्षेप में Semicon 2.0 कहा जा रहा है, और जिसका कुल आर्थिक आकार ₹1,27,500 करोड़ है। यह सिर्फ पुरानी योजना में कुछ पैसे जोड़ देने वाला मामला नहीं है, बल्कि यह उस मूल ढांचे में ही एक बड़ा बदलाव है, जिस पर 2021 में पहला Semiconductor Mission खड़ा किया गया था।

17 से 19 सितंबर 2026 के बीच, नई दिल्ली के Yashobhoomi में हुए SEMICON India 2026 के पांचवें संस्करण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस बदली हुई रणनीति का उद्घाटन किया, और सरकार ने बताया कि इस आयोजन के दौरान ही लगभग ₹1 लाख करोड़ के नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। लेकिन असली सवाल यह है, आखिर सरकार को अपनी पहले से चल रही, अच्छी-खासी सफल दिख रही योजना को फिर से क्यों गढ़ना पड़ा, और इसमें बदला क्या-क्या है। आज हम इसी policy change को, हर पहलू से, विस्तार से समझेंगे।

पहले पुरानी नीति की बुनियादी कमज़ोरी समझ लीजिए

दिसंबर 2021 में जब पहला Semiconductor Mission शुरू हुआ था, तब इसकी संरचना में एक बड़ी असमानता थी। उस समय सरकार ने silicon fabs के लिए तो 50 प्रतिशत तक की fiscal support देने का वादा किया, लेकिन compound semiconductors, silicon photonics, sensors fabs और ATMP-OSAT जैसी packaging सुविधाओं के लिए यह समर्थन सिर्फ 30 प्रतिशत तक ही सीमित रखा गया। यह असमानता जल्द ही एक व्यावहारिक समस्या बनकर सामने आई, क्योंकि निवेशकों के लिए यह गणित आकर्षक नहीं बैठ रहा था, खासकर तब जब दुनिया भर के दूसरे देश भी इसी उद्योग को लुभाने के लिए भारी प्रोत्साहन दे रहे थे।

इसी वजह से सितंबर 2022 में सरकार ने पहला बड़ा सुधार किया, और सभी technology nodes के लिए, चाहे वह fab हो, display manufacturing हो, compound semiconductor हो या packaging सुविधा, हर जगह एक समान 50 प्रतिशत fiscal support लागू कर दिया। यह पहला संकेत था कि सरकार अपनी नीति को बाज़ार की असली ज़रूरतों के हिसाब से लगातार समायोजित (calibrate) करती रहेगी।

🔴 सबसे बड़ा बदलाव, पांच साल की योजना अब बारह साल की

Semicon 2.0 में जो सबसे महत्वपूर्ण, सबसे कम-चर्चित बदलाव किया गया है, वह है योजना की समयावधि (lifecycle) का विस्तार। पहला मिशन सिर्फ पांच साल के लिए बनाया गया था, लेकिन नई नीति के तहत इसे बढ़ाकर बारह साल कर दिया गया है।

इसके पीछे तर्क बेहद व्यावहारिक है। Silicon fabs, assembly units और testing facilities जैसी परियोजनाएं बेहद पूंजी-गहन (capital intensive) होती हैं, और इनका निर्माण, स्थिरीकरण और पूर्ण उत्पादन क्षमता तक पहुंचना, अक्सर पांच साल से कहीं ज़्यादा समय लेता है। जब कोई बड़ी वैश्विक कंपनी या दीर्घकालिक संस्थागत निवेशक (institutional investor) भारत में अरबों डॉलर लगाने का फैसला करता है, तो उसे यह भरोसा चाहिए होता है कि सरकार की नीति सिर्फ अगले चुनाव या अगले बजट तक सीमित नहीं रहेगी। बारह साल की समयसीमा उस भरोसे को मज़बूत करने के लिए बनाई गई है।

Semicon 2.0 के छह स्तंभ, पूरी संरचना समझिए

नई योजना को छह मुख्य स्तंभों और दस श्रेणियों में बांटा गया है, जो पूरे semiconductor value chain को कवर करते हैं।

स्तंभ फोकस क्षेत्र
Design पूरी तरह भारत-निर्मित (full stack) semiconductor intellectual property का विकास
Machines and Materials Semiconductor बनाने के उपकरण और कच्चे माल का घरेलू उत्पादन
Setting up more Fabs नई wafer fabrication इकाइयां स्थापित करना
ATMP-OSAT को मज़बूत करना Assembly, Testing, Marking और Packaging क्षमता को और बढ़ाना
Research and Development अनुसंधान को बढ़ावा, ताकि भारत सिर्फ manufacturing तक सीमित न रहे
Talent Development Industry-led research और training centres के ज़रिए भविष्य के लिए तैयार कुशल कार्यबल बनाना

31 अगस्त 2026 को इस योजना का विस्तृत notification जारी किया गया, जिसमें हर श्रेणी के लिए पात्रता और वित्तीय सहायता का सटीक ढांचा तय किया गया।

🔴 Fab बनाम ATMP बनाम Chip Design, किसे कितना मिलेगा

यह समझना ज़रूरी है कि अलग-अलग तरह की परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की संरचना अलग-अलग रखी गई है।

श्रेणी सहायता का स्वरूप
Silicon Wafer Fabs पात्र पूंजीगत व्यय (capex) पर 40 प्रतिशत तक की fiscal support, pari-passu यानी समान भागीदारी के आधार पर
Compound Semiconductors, ATMP-OSAT पूंजीगत व्यय पर 50 प्रतिशत तक की सहायता
Design Startups और MSMEs ₹15 करोड़ तक की seed funding, और milestone-आधारित advance seed funding जो project cost का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम ₹15 करोड़ की सीमा के साथ
Startups-MSME के अलावा अन्य Design कंपनियां Royalty financing और equity co-investment जैसे विकल्प

यहां एक दिलचस्प तकनीकी बदलाव भी है, silicon fabs के लिए fiscal support 50 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि ATMP और packaging इकाइयों के लिए यह 50 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। इसका एक संभावित तर्क यह हो सकता है कि सरकार अब अपनी सीमित पूंजी को उन क्षेत्रों में ज़्यादा बांटना चाहती है, जहां भारत तेज़ी से, कम समय में उत्पादन शुरू कर पा रहा है, यानी packaging और assembly, जबकि fab निवेशकों से खुद ज़्यादा पूंजी लगाने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि सरकारी संसाधनों का दायरा व्यापक बना रहे।

India Semiconductor Mission की भूमिका, नोडल एजेंसी के तौर पर

Semicon 2.0 के तहत, India Semiconductor Mission यानी ISM को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसका काम आवेदन आमंत्रित करना, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन (appraisal) करना, और फिर योग्य आवेदकों की सिफारिश Ministry of Electronics and Information Technology यानी MeitY को करना है। India Electronics and Semiconductor Association के अध्यक्ष Ashok Chandak ने इस पूरी प्रक्रिया की गति की तारीफ करते हुए कहा कि Cabinet की मंज़ूरी से लेकर आधिकारिक notification तक जिस रफ़्तार से सरकार आगे बढ़ी, वह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

🔴 अब तक बने कारखाने, कौन-सा राज्य कहां तक पहुंचा

Semicon 2.0 को समझने के लिए यह भी देखना ज़रूरी है कि पहले चरण में असल में ज़मीन पर क्या बना, क्योंकि यही अनुभव नई नीति की दिशा तय करता है। सितंबर 2026 तक, छह राज्यों में कुल 12 परियोजनाएं मंज़ूर हो चुकी हैं, जिनका संचयी निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से ज़्यादा है, और इनमें से तीन परियोजनाएं पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।

स्थान परियोजना और विवरण
Dholera, गुजरात Tata Electronics और Taiwan की PSMC की साझेदारी में भारत की पहली सच्ची commercial wafer fab, करीब ₹91,000 करोड़ के निवेश से, 28nm node पर 50,000 wafers प्रति माह की क्षमता, पहला silicon दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद
Sanand, गुजरात तीन packaging इकाइयां, Micron Technology, Kaynes Semicon, और CG Power-Renesas-Stars Microelectronics, इनमें से Micron और Kaynes पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, Kaynes की इकाई तो निर्माण शुरू होने के सिर्फ 14 महीनों में उत्पादन तक पहुंच गई
Jagiroad, असम Tata Semiconductor Assembly and Test की सबसे बड़ी ISM परियोजना, करीब ₹22,916 करोड़ का निवेश, पूर्वोत्तर भारत में इस उद्योग का पहला बड़ा केंद्र
Surat, गुजरात Suchi Semicon की OSAT सुविधा, प्रति वर्ष 100 करोड़ से ज़्यादा discrete semiconductor chips बनाने की क्षमता, मुख्यतः automotive और power electronics के लिए
Bhubaneswar, ओडिशा भारत की पहली heterogeneous integration packaging सुविधा

🔴 Tamil Nadu और Karnataka अभी भी सूची से बाहर क्यों हैं

यह एक बेहद दिलचस्प, कम-चर्चित पहलू है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में देश का अग्रणी राज्य Tamil Nadu, और chip design की राजधानी माना जाने वाला Karnataka, दोनों ही अब तक स्वीकृत बड़ी manufacturing परियोजनाओं की सूची से बाहर हैं। इसका मुख्य कारण Gujarat की तैयारी मानी जाती है, Dholera Special Investment Region जैसे पहले से चिह्नित, राज्य-प्रबंधित भूमि क्षेत्र, बिजली-पानी की पूर्व-निर्मित बुनियादी सुविधाएं, और Special Economic Zone जैसी मंज़ूरियां, यह सब मिलाकर Gujarat को सबसे तेज़ी से क्रियान्वयन करने वाला राज्य बना देती हैं। हालांकि Karnataka और Tamil Nadu दोनों ने अपनी अलग semiconductor नीतियां घोषित कर रखी हैं, और उनका ज़ोर design तथा भविष्य की परियोजनाओं में हिस्सेदारी पर बना हुआ है।

🔴 पानी और बिजली की चुनौती, सबसे कम समझी जाने वाली बाधा

यह समझना ज़रूरी है कि एक आधुनिक semiconductor fab किसी सामान्य फैक्ट्री जैसी नहीं होती। इसे चलाने के लिए बेहद उच्च-शुद्धता वाला पानी (ultra-pure water) और पूरी तरह स्थिर, बिना किसी उतार-चढ़ाव वाली बिजली आपूर्ति चाहिए होती है, क्योंकि बिजली में एक सेकंड का भी उतार-चढ़ाव करोड़ों रुपये की wafer खराब कर सकता है। यही वजह है कि राज्य सरकारों ने अपनी अलग-अलग नीतियों में पानी और बिजली पर विशेष रियायतें जोड़ी हैं। Gujarat अपनी नीति में भूमि, पानी और बिजली पर रियायती दरें देता है, साथ ही पहले 200 एकड़ के लिए 75 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी भी। उत्तर प्रदेश की 2024 की नीति में 50 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी और 10 साल तक पूर्ण SGST छूट का प्रावधान है।

यह पानी और बिजली की चुनौती सिर्फ निर्माण के दौरान ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संचालन (long-term operation) के दौरान भी बनी रहती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही जल-संकट या बिजली आपूर्ति में अस्थिरता की समस्या रही है। यही कारण है कि राज्य स्तर पर बुनियादी ढांचे की तैयारी, केंद्रीय प्रोत्साहन जितनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

🔴 Taiwan और China पर निर्भरता, क्या यह मिशन इसे वाकई कम कर पाएगा

एक ईमानदार आकलन के लिए यह समझना ज़रूरी है कि Dholera की fab भी पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित नहीं है, यह Taiwan की PSMC के साथ साझेदारी में बन रही है, और इसमें इस्तेमाल होने वाली advanced उपकरण, जैसे EUV और DUV lithography मशीनें, Netherlands की कंपनी ASML से आ रही हैं, जिसके लिए मई 2026 में एक framework agreement भी साइन हो चुका है। यानी भारत अभी भी सबसे advanced तकनीक और उपकरणों के लिए विदेशी साझेदारों पर निर्भर है, यह निर्भरता Semicon 2.0 से रातों-रात खत्म नहीं होने वाली।

जो असली रणनीतिक बदलाव आ रहा है, वह यह है कि भारत अब सिर्फ चिप import करने वाला देश न रहकर, धीरे-धीरे उस वैश्विक supply chain का एक भागीदार (partner) बनने की कोशिश कर रहा है, भले ही अभी वह सबसे advanced node पर नहीं, बल्कि 28 नैनोमीटर जैसे mature nodes पर काम कर रहा हो। यह node स्तर आगे विस्तार से समझना ज़रूरी है।

🔴 भारत किस स्तर के Chips पर फोकस कर रहा है

यह समझना बेहद ज़रूरी है कि दुनिया के सबसे advanced chips, जो 3 नैनोमीटर या उससे भी छोटे नोड पर बनते हैं, और जो सबसे नए स्मार्टफोन तथा AI processors में इस्तेमाल होते हैं, उन पर अभी भी सिर्फ Taiwan की TSMC और कुछ हद तक Samsung का ही एकाधिकार है। भारत की Dholera fab फिलहाल 28 नैनोमीटर नोड पर काम कर रही है, जिसे technology की भाषा में mature node कहा जाता है।

यह mature node कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, क्योंकि दुनिया की करीब 70 से 80 प्रतिशत semiconductor मांग असल में इन्हीं mature nodes से पूरी होती है, न कि सबसे advanced चिप्स से। यह चिप्स automotive electronics, industrial microcontrollers, IoT उपकरणों, power management systems और consumer electronics में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं, यानी ठीक वही क्षेत्र जहां भारत की अपनी घरेलू मांग भी सबसे तेज़ी से बढ़ रही है।

🔴 Automotive और Telecom चिप्स, असली घरेलू ज़रूरत कहां है

2021 से 2023 के बीच वैश्विक चिप संकट के दौरान, भारत में सबसे ज़्यादा असर automotive क्षेत्र पर पड़ा था, जहां चिप की कमी की वजह से महीनों तक गाड़ियों की डिलीवरी टलती रही। Dholera की fab को खासतौर पर automotive chips, EV power management, high-performance computing और defence इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसी तरह Sanand में बन रही CG Power-Renesas-Stars Microelectronics परियोजना खासतौर पर automotive, industrial, 5G और IoT applications के लिए packaging सुविधा तैयार कर रही है, जिसकी संयुक्त क्षमता प्रतिदिन 1.5 करोड़ चिप्स तक पहुंचने की योजना है।

Telecom क्षेत्र के लिए भी यह मिशन महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपने 5G नेटवर्क विस्तार और आने वाले वर्षों में 6G की तैयारी के दौरान, यह नहीं चाहता कि उसकी दूरसंचार बुनियादी संरचना पूरी तरह आयातित चिप्स पर निर्भर रहे, खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से।

Design Ecosystem, वह हिस्सा जहां भारत पहले से मज़बूत है

Semicon 2.0 का एक बड़ा फोकस chip design पर भी है, और यह वह क्षेत्र है जहां भारत को शुरुआत बिल्कुल शून्य से नहीं करनी पड़ रही। Design Linked Incentive यानी DLI योजना के तहत, अब तक 24 semiconductor design परियोजनाओं को समर्थन मिल चुका है, जिनमें video surveillance, drone detection, energy metering, microprocessors, satellite communication और broadband technology जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन startups ने मिलकर लगभग ₹430 करोड़ का venture capital निवेश भी आकर्षित किया है।

Chips to Startup यानी C2S कार्यक्रम के तहत, 500 से ज़्यादा संस्थाएं, जिनमें 400 से ज़्यादा शैक्षणिक संस्थान और 100 से ज़्यादा startups शामिल हैं, इससे जुड़ चुकी हैं, और ChipIN Centre के ज़रिए एक लाख से ज़्यादा इंजीनियरों को advanced chip design tools तक पहुंच दी जा चुकी है। अप्रैल 2026 तक, 75 संस्थानों ने मिलकर 211 चिप डिज़ाइन तैयार किए, जिनमें से सात को 12 नैनोमीटर जैसे advanced nodes तक पर fabricate भी किया जा चुका है।

एक निष्पक्ष नज़रिया, चुनौतियां जो अभी भी बाकी हैं

एक ईमानदार विश्लेषण के लिए यह स्वीकार करना ज़रूरी है कि Semicon 2.0 के बावजूद कई बड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। सबसे advanced technology nodes पर भारत अभी भी दशकों पीछे है, और यह अंतर रातों-रात नहीं भरा जा सकता। दुनिया के दूसरे देश, जैसे अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ, भी अपनी-अपनी semiconductor नीतियों में भारी निवेश कर रहे हैं, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज़ हो रही है। साथ ही, यह भी सच है कि पानी, बिजली और skilled workforce जैसी बुनियादी सुविधाएं सिर्फ कुछ राज्यों, खासकर Gujarat तक ही सीमित होकर रह गई हैं, जिससे बाकी राज्यों में असमान विकास की चिंता भी जायज़ है।

दूसरी तरफ, यह भी उतना ही सच है कि 2021 में जब यह मिशन शुरू हुआ था, तब भारत के पास एक भी commercial-scale fab नहीं थी, और आज, सिर्फ पांच साल के भीतर, तीन परियोजनाएं व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, और पहली बड़ी logic fab से पहला silicon आने की उम्मीद है। यह गति, वैश्विक मानकों से भी तेज़ मानी जा रही है।

निष्कर्ष, नीति में बदलाव का मतलब है रणनीति में परिपक्वता

Semicon 2.0 को समझने का सबसे सही तरीका यह है कि इसे किसी असफलता की स्वीकृति नहीं, बल्कि एक परिपक्व होती रणनीति की निशानी माना जाए। पांच साल की समयसीमा को बारह साल तक बढ़ाना, fab और packaging के बीच वित्तीय सहायता को फिर से संतुलित करना, और design तथा talent development पर अलग से ज़ोर देना, यह सब दिखाता है कि सरकार पहले चरण के अनुभवों से सीख रही है, और उसी हिसाब से अपनी नीति को ढाल रही है।

असली परीक्षा अब आगे है, क्या Dholera की fab दिसंबर 2026 तक अपना पहला silicon बना पाती है, क्या Karnataka और Tamil Nadu जैसे राज्य भी बड़ी manufacturing परियोजनाओं की सूची में शामिल हो पाते हैं, और क्या भारत अगले दशक में सिर्फ mature nodes तक सीमित न रहकर, धीरे-धीरे advanced nodes की तरफ भी बढ़ पाता है। यह सवाल अभी खुले हैं, लेकिन जो बात स्पष्ट है, वह यह कि भारत अब सिर्फ योजनाएं बनाने के दौर से निकलकर, असल में factory floor पर चिप्स बनाने के दौर में प्रवेश कर चुका है।

आपको क्या लगता है, क्या भारत अगले दशक में सिर्फ mature nodes तक सीमित रहेगा, या यह advanced semiconductor technology में भी अपनी जगह बना पाएगा? नीचे टिप्पणी में ज़रूर बताएं।

स्रोत / Sources:

1. Business Standard, "Govt notifies ₹1.27 trillion Semicon 2.0, offers 40% fab capex support", August 31, 2026
2. Republic World, "Union Cabinet Approves India Semiconductor Mission 2.0 With Mega Outlay Of Rs 1.25 Lakh Crore", July 15, 2026
3. Next IAS, "Semicon 2.0 Scheme, India Approves ₹1.27 Lakh Crore Outlay", September 1, 2026
4. Beacon Filing, "India Semiconductor Mission, 50% Incentives for Fabs"
5. Deccan Herald, "Government modifies PLI scheme for semiconductors"
6. APAC Media, "SEMICON India 2026 Explained, How India Is Building Its Semiconductor Ecosystem", September 16, 2026
7. IBEF, "SEMICON India 2026, India's Semiconductor Push Moves from Ambition to Ecosystem"
8. IBEF, "SEMICON India 2026, From Silicon to Systems, India's Semiconductor Journey on Display"
9. DD News, "SEMICON India 2026, India's semiconductor push moves from ambition to ecosystem"
10. Indian Masterminds, "SEMICON India 2026, India's Semiconductor Ecosystem Takes Shape Across Design, AI and Manufacturing"
11. Expertlancing Research Services, "India's Semiconductor Race, Why Gujarat Leads the State-Wise Chip Investment Map", June 30, 2026
12. IMARC Engineering, "Semiconductor Plant Site Selection in India, Gujarat, Assam Lead in 2026"
13. IMARC Engineering, "Semiconductor Manufacturing Expansion in India 2026"
14. TradeBrains, "12 Semiconductor Projects Worth ₹1,695.54 Cr Approved Across 6 States Under India Semiconductor Mission 2.0"
15. Barristery.in, "Semiconductor Plants in India 2026"
16. Fidus, "ISM Approved Projects 2026, All Semiconductor Projects in India, Status, Investment, Location"
17. News On Project, "India's Semiconductor Investment Boom, New Projects, Global Investors and the Next Manufacturing Opportunity"
18. Mutual Funds Guide Substack, "Forging India's Silicon Future"
19. PIB, "India Semiconductor Mission 2.0", February 7, 2026

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