योगी सरकार में UP की कानून-व्यवस्था 2026: माफिया, अपराध और महिला सुरक्षा
लेखक: आकाश दीप | युगबोध
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बहस लंबे समय से होती रही है। अपराध, जमीनों पर अवैध कब्जे, महिलाओं की सुरक्षा, माफिया का प्रभाव और दंगों जैसी घटनाएँ इस बहस के प्रमुख विषय रहे हैं। लेकिन किसी सरकार के काम का मूल्यांकन केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि सही समयावधि, दर्ज अपराधों के आँकड़ों, पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक परिणामों के आधार पर होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी की सरकार 2012 से मार्च 2017 तक सत्ता में रही। योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसलिए 2017 को पूरा साल योगी सरकार का बताकर 2012 से तुलना करना सही नहीं होगा। इस लेख में दोनों सरकारों की समयावधि स्पष्ट रखी गई है और 2026 तक उपलब्ध नवीनतम प्रकाशित आँकड़ों तथा सरकारी समीक्षा को अलग-अलग समझाया गया है।
सपा सरकार का कार्यकाल: कानून-व्यवस्था क्यों बना बड़ा चुनावी मुद्दा?
वर्ष 2012 से मार्च 2017 तक अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार रही। इस अवधि में कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, जमीनों पर कब्जे और प्रभावशाली अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे। सरकार पर आरोप लगते थे कि कुछ मामलों में स्थानीय दबंगों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के कारण आम नागरिक को न्याय पाने में कठिनाई होती है। इन आरोपों का मूल्यांकन अलग-अलग मामलों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए, लेकिन कानून-व्यवस्था 2017 के विधानसभा चुनाव का महत्वपूर्ण मुद्दा जरूर बनी।
मुजफ्फरनगर में 2013 की सामुदायिक हिंसा इस कार्यकाल की गंभीर घटनाओं में शामिल थी। इस घटना ने प्रशासन की तैयारी, समय पर हस्तक्षेप और लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। ऐसी घटनाओं का असर केवल तत्काल हिंसा तक सीमित नहीं रहता; वे सामाजिक विश्वास, स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रशासन पर जनता के भरोसे को भी प्रभावित करती हैं।
सपा सरकार के पूरे कार्यकाल का आकलन करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक घटना या किसी एक अपराध श्रेणी से पूरे राज्य की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हत्या, लूट, डकैती, दंगा, महिलाओं के खिलाफ अपराध और कुल दर्ज मामलों को अलग-अलग देखना चाहिए। यही तरीका सरकारों के बीच निष्पक्ष तुलना के लिए भी जरूरी है।
मार्च 2017 के बाद योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपराधियों और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा। सरकार की नीति का संदेश था कि अपराधी की राजनीतिक या आर्थिक हैसियत कानून से ऊपर नहीं होनी चाहिए।
इस रणनीति में गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई, अपराध से जुड़े नेटवर्क पर प्रहार, कथित अवैध संपत्तियों की जब्ती, भू-माफिया के खिलाफ अभियान, पुलिस की जवाबदेही और गंभीर मामलों में अभियोजन को मजबूत करने जैसे कदम शामिल रहे। सरकार ने इसे जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में प्रस्तुत किया।
किसी भी सख्त पुलिस नीति की सफलता केवल गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि जांच में पर्याप्त साक्ष्य जुटे या नहीं, अदालत में मामला कितना मजबूत रहा, पीड़ित को न्याय मिला या नहीं और अपराधी दोबारा उसी तरह की गतिविधियों में शामिल हुआ या नहीं।
2026 की पुलिस समीक्षा: दोषसिद्धि और माफिया पर कार्रवाई के आँकड़े
जून 2026 में उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण ने पुलिस की एक साल की उपलब्धियों का विवरण दिया। The Indian Express और Hindustan Times की रिपोर्टों के अनुसार, 31 मई 2025 से 31 मई 2026 की समीक्षा अवधि में अदालतों ने 32,071 मामलों का फैसला किया। इनमें 29,911 मामलों में दोषसिद्धि हुई।
| पुलिस समीक्षा का संकेतक | मई 2025–मई 2026 |
|---|---|
| अदालतों द्वारा तय किए गए मामले | 32,071 |
| दोषसिद्धि वाले मामले | 29,911 |
| इन तय मामलों में दोषसिद्धि का अनुपात | लगभग 93.3% |
| सजा पाने वाले आरोपी | 42,681 |
| मृत्युदंड की सजा | 18 आरोपी |
| आजीवन कारावास की सजा | 3,340 आरोपी |
| गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई | 5,684 अपराधियों के खिलाफ |
| गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुर्क संपत्ति | लगभग ₹788.38 करोड़ |
ये आँकड़े 2026 में पुलिस द्वारा प्रस्तुत वार्षिक समीक्षा से संबंधित हैं, न कि NCRB की पूरे वर्ष की अपराध रिपोर्ट से। लगभग 93.3% का अनुपात उन मामलों का है जिन पर संबंधित अवधि में अदालतों ने फैसला किया। इसे उत्तर प्रदेश में दर्ज हर अपराध की दोषसिद्धि दर कहना गलत होगा। फिर भी, मामलों को अदालत तक पहुँचाने और प्रभावी अभियोजन पर जोर देने के लिहाज से यह महत्वपूर्ण संकेतक है।
DGP की इसी समीक्षा के अनुसार, संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई में गैंगस्टर अधिनियम के तहत 5,684 अपराधियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और लगभग ₹788.38 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई। इससे सरकार की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने आता है—सिर्फ अपराध में शामिल व्यक्तियों तक सीमित रहने के बजाय उनके आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना।
भू-माफिया के खिलाफ अभियान: 84,005 हेक्टेयर जमीन कब्जामुक्त
जमीन पर अवैध कब्जा उत्तर प्रदेश में लंबे समय से आम नागरिकों और सार्वजनिक संस्थाओं की बड़ी समस्याओं में शामिल रहा है। किसी की जमीन पर दबंगई से कब्जा हो जाने पर पीड़ित को राजस्व विभाग, पुलिस और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एंटी भू-माफिया अभियान और शिकायतों की निगरानी के लिए पोर्टल विकसित किया।
अगस्त 2026 में राजस्व विभाग के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में राज्य में 84,005 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। यह लगभग 2.08 लाख एकड़ के बराबर है। यह अवधि मार्च 2017 से 2026 तक योगी सरकार के कार्यकाल को समेटती है।
| भू-माफिया विरोधी अभियान | अगस्त 2026 तक रिपोर्ट किया गया आँकड़ा |
|---|---|
| अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि | 84,005 हेक्टेयर से अधिक |
| लगभग एकड़ में क्षेत्रफल | 2.08 लाख एकड़ |
| एंटी भू-माफिया पोर्टल पर प्राप्त शिकायतें | 4,34,016 |
| निस्तारित शिकायतें | 4,31,697 |
| रिपोर्ट के अनुसार लंबित शिकायतें | 2,319 |
| चिह्नित भू-माफिया | 1,413 |
| जेल में बताए गए भू-माफिया | 144 |
ये आँकड़े राजस्व विभाग के हवाले से 12 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में दिए गए हैं। इन्हें सरकारी अभियान की रिपोर्टेड उपलब्धि के रूप में समझना चाहिए। मुक्त कराई गई भूमि में सार्वजनिक और सरकारी जमीन का बड़ा हिस्सा शामिल है; इसलिए इसे केवल निजी नागरिकों को वापस मिली जमीन नहीं कहा जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, अभियान के दौरान 25,068 राजस्व मामले, 1,168 दीवानी मामले और 4,751 FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी दी गई। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया चलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जमीन से जुड़े विवादों में कब्जा हटाने के अलावा स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायिक आदेशों का पालन भी जरूरी होता है।
इस अभियान का संभावित विकासात्मक महत्व भी है। सार्वजनिक जमीन अवैध कब्जे से मुक्त होने पर उसे नियमों के अनुसार उद्योग, लॉजिस्टिक्स, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों या अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि, हर जमीन का वास्तविक उपयोग संबंधित मंजूरी और परियोजना की जरूरत पर निर्भर करेगा।
महिलाओं की सुरक्षा: एंटी-रोमियो स्क्वॉड से मिशन शक्ति तक
महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने 2017 में एंटी-रोमियो स्क्वॉड शुरू किया। इसका उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं से छेड़छाड़ रोकने के लिए पुलिस की मौजूदगी और निगरानी बढ़ाना था। आगे चलकर मिशन शक्ति, महिला हेल्प डेस्क, महिला पुलिस बीट और सेफ सिटी जैसी व्यवस्थाओं को भी इस व्यापक प्रयास का हिस्सा बनाया गया।
अक्टूबर 2025 में मिशन शक्ति के विशेष अभियान के दौरान प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एंटी-रोमियो स्क्वॉड ने नौ दिनों में लगभग 1.08 लाख मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा जाँच की। इस दौरान 9.77 लाख से अधिक लोगों की जाँच की गई, 2,542 मामले दर्ज हुए और 3,972 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई। लगभग 3.14 लाख लोगों को चेतावनी भी दी गई।
| मिशन शक्ति विशेष अभियान | अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट |
|---|---|
| मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की जाँच | लगभग 1.08 लाख |
| जाँचे गए लोग | 9.77 लाख से अधिक |
| दर्ज मामले | 2,542 |
| गिरफ्तार किए गए लोग | 3,972 |
| चेतावनी दिए गए लोग | लगभग 3.14 लाख |
ये आँकड़े एक विशेष नौ-दिवसीय अभियान के हैं, पूरे साल के नहीं। इनसे पुलिस की निगरानी और अभियान के पैमाने का अंदाजा मिलता है, लेकिन केवल जाँच या गिरफ्तारियों की संख्या से यह साबित नहीं होता कि महिलाओं के खिलाफ अपराध उसी अनुपात में कम हो गए। इसके लिए अपराध दर, शिकायतों की प्रवृत्ति, मामलों के निस्तारण और पीड़ितों को मिले न्याय का भी अध्ययन जरूरी है।
महिला सुरक्षा की व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब कोई महिला बिना डर के शिकायत कर सके, पुलिस उसकी बात गंभीरता से सुने, साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई हो और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले। पुलिस कार्रवाई के दौरान नागरिक अधिकारों का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
NCRB के नवीनतम आँकड़े: 2026 तक क्या पता चलता है?
अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NCRB की नवीनतम प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट Crime in India 2024 है। इसलिए 2025 और 2026 के पूरे साल के अपराध आँकड़े अभी NCRB के अंतिम वार्षिक आँकड़ों के रूप में उपलब्ध नहीं माने जा सकते। 2026 में पुलिस विभाग द्वारा जारी समीक्षा और विशेष अभियानों के आँकड़े उपयोगी हैं, लेकिन उनकी तुलना NCRB की वार्षिक रिपोर्ट से सीधे नहीं करनी चाहिए।
NCRB की रिपोर्ट में हत्या, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी, साइबर अपराध, दंगा और अन्य अपराध श्रेणियों के आँकड़े अलग-अलग दिए जाते हैं। किसी सरकार के कार्यकाल की निष्पक्ष तुलना के लिए समान अपराध श्रेणी, समान परिभाषा और पूरे कैलेंडर वर्ष की तुलना जरूरी है। 2017 संक्रमण वर्ष है, क्योंकि उस साल मार्च में सरकार बदली थी।
NCRB 2023 के आँकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल दर्ज अपराध दर 335.3 प्रति लाख आबादी थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 448.3 था। यानी राज्य की दर्ज अपराध दर उस वर्ष राष्ट्रीय औसत से लगभग 25% कम थी। यह महत्वपूर्ण संदर्भ है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर अपराध श्रेणी में उत्तर प्रदेश की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी।
| NCRB 2023 का संकेतक | आँकड़ा |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश की दर्ज अपराध दर | 335.3 प्रति लाख आबादी |
| राष्ट्रीय औसत | 448.3 प्रति लाख आबादी |
| राष्ट्रीय औसत से अंतर | लगभग 25% कम |
यहाँ एक जरूरी सावधानी है। दर्ज अपराधों की दर पुलिस में दर्ज मामलों को मापती है, सभी वास्तविक घटनाओं को नहीं। रिपोर्टिंग की प्रवृत्ति, शिकायत दर्ज कराने की सुविधा और पुलिस रिकॉर्डिंग में बदलाव भी आँकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अपराध दर को गंभीर अपराधों की अलग-अलग दरों और अन्य संकेतकों के साथ पढ़ना चाहिए।
दंगे और सार्वजनिक शांति: सरकारी दावे और आँकड़ों का संदर्भ
योगी सरकार ने सार्वजनिक शांति और सामुदायिक हिंसा पर नियंत्रण को अपनी कानून-व्यवस्था नीति का प्रमुख हिस्सा बताया है। अक्टूबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि NCRB 2023 के अनुसार राज्य में उस साल सांप्रदायिक या धार्मिक दंगों का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। उसी रिपोर्ट में 2012 से 2017 के बीच 815 दंगों और 192 मौतों का सरकारी दावा भी उद्धृत किया गया।
इन आँकड़ों को सही संदर्भ में समझना जरूरी है। दंगों की श्रेणी और परिभाषा, रिपोर्टिंग का तरीका तथा संबंधित अवधि की पुष्टि मूल NCRB तालिकाओं से की जानी चाहिए। इसलिए 815 दंगों और 192 मौतों के आँकड़े को यहाँ सरकार के हवाले से प्रकाशित दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित अंतिम तुलना के रूप में।
दंगों को रोकने में प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। समय पर पुलिस की तैनाती, खुफिया जानकारी, अफवाहों पर नियंत्रण, निष्पक्ष कार्रवाई और सभी समुदायों की सुरक्षा से तनाव को हिंसा में बदलने से रोका जा सकता है। किसी भी सरकार की सफलता का मूल्यांकन केवल घटना न होने से नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और कानून के निष्पक्ष पालन से भी होना चाहिए।
सपा बनाम योगी सरकार: तुलना कैसे करनी चाहिए?
दोनों सरकारों के बीच तुलना करते समय समयावधि की गलती से बचना सबसे जरूरी है। सपा सरकार का कार्यकाल 2012 से मार्च 2017 तक रहा, जबकि योगी सरकार मार्च 2017 में सत्ता में आई। इस कारण 2017 को किसी एक सरकार का पूरा साल मानना उचित नहीं है।
| तुलना का पहलू | सपा सरकार | योगी सरकार |
|---|---|---|
| कार्यकाल | 2012–मार्च 2017 | मार्च 2017 से आगे |
| प्रमुख राजनीतिक मुद्दा | कानून-व्यवस्था और अपराध पर आलोचना | जीरो टॉलरेंस और संगठित अपराध पर कार्रवाई |
| भू-माफिया पर नीति | इस लेख में समान परिभाषा वाला तुलनीय आँकड़ा उपलब्ध नहीं | अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 84,005 हेक्टेयर से अधिक जमीन कब्जामुक्त |
| न्यायिक परिणाम | इस लेख में समान अवधि और समान पद्धति का तुलनीय आँकड़ा उपलब्ध नहीं | मई 2025–मई 2026 में तय 32,071 मामलों में 29,911 दोषसिद्धियाँ, पुलिस समीक्षा के अनुसार |
| NCRB तुलना | 2012–2016 के पूरे वर्षों का डेटा अलग से देखना जरूरी | 2018 से आगे के पूरे वर्षों को समान अपराध श्रेणियों में देखना जरूरी |
इस तालिका का उद्देश्य यह दिखाना है कि किन बिंदुओं पर स्पष्ट तुलना उपलब्ध है और किन बिंदुओं पर अतिरिक्त मूल डेटा की जरूरत है। बिना समान परिभाषा और समान अवधि के आँकड़े मिलाए किसी सरकार को अपराध में निश्चित प्रतिशत कमी या वृद्धि का श्रेय देना उचित नहीं होगा।
अभी भी किन चुनौतियों पर काम जरूरी है?
सख्त कार्रवाई और सरकारी अभियानों के बावजूद कानून-व्यवस्था में सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। पुलिस बल की उपलब्धता, जांच की गुणवत्ता, अदालतों में लंबित मामले, साइबर अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध और आम नागरिक की शिकायतों का समय पर निस्तारण ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है।
संपत्ति जब्ती या बुलडोजर कार्रवाई जैसे कदमों में कानून की प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। आरोप और दोषसिद्धि में अंतर होता है। किसी व्यक्ति की संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई वैधानिक आधार पर होनी चाहिए, और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार मिलना चाहिए। कानून का शासन तभी मजबूत होता है, जब अपराध के खिलाफ सख्ती और नागरिक अधिकारों की रक्षा दोनों साथ चलें।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने में आसानी, पीड़िता की गोपनीयता, समय पर जांच और दोषियों को सजा दिलाना भी आवश्यक है। इसी तरह माफिया के खिलाफ अभियान का दीर्घकालीन परिणाम तभी मजबूत होगा, जब अवैध कब्जे दोबारा न हों और नागरिकों को अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष न करना पड़े।
निष्कर्ष: 2017 के बाद कानून-व्यवस्था की नीति में सख्ती, अब परिणामों की निरंतर जाँच जरूरी
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मार्च 2017 के बाद अपराध और संगठित माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी प्रमुख पहचान बनाया। अगस्त 2026 में सामने आए भू-माफिया अभियान के आँकड़े, जून 2026 में पुलिस द्वारा प्रस्तुत दोषसिद्धि और गैंगस्टर अधिनियम संबंधी आँकड़े तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाए गए अभियान इस नीति के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सपा सरकार और योगी सरकार की तुलना करते समय 2017 को पूरे साल किसी एक सरकार के खाते में नहीं रखा जा सकता। इसी तरह 2026 के पुलिस समीक्षा आँकड़ों को NCRB की वार्षिक रिपोर्ट बताना भी गलत होगा। सही तारीख, सही स्रोत और समान श्रेणी के आँकड़े ही मजबूत निष्कर्ष का आधार बनते हैं।
योगी सरकार की कानून-व्यवस्था नीति का सकारात्मक पक्ष संगठित अपराध पर कार्रवाई, सार्वजनिक जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के अभियान और महिला सुरक्षा के लिए पुलिस की सक्रियता में दिखाई देता है। आगे की कसौटी यह होगी कि इन पहलों से आम नागरिक को लगातार सुरक्षित माहौल, निष्पक्ष जांच और समय पर न्याय कितना मिलता है।
किसी भी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होनी चाहिए कि कानून का डर अपराधी को हो और आम नागरिक को कानून से सुरक्षा का भरोसा मिले।
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स्रोत / Sources:
- The Indian Express, 1–2 जून 2026 — उत्तर प्रदेश DGP की पुलिस समीक्षा, दोषसिद्धि और गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई: रिपोर्ट पढ़ें.
- Hindustan Times, 1 जून 2026 — 93% से अधिक दोषसिद्धि अनुपात, संपत्ति कुर्की और प्रमुख अपराधों में बदलाव संबंधी पुलिस समीक्षा: रिपोर्ट पढ़ें.
- Business Standard / PTI, 12 अगस्त 2026 — उत्तर प्रदेश में 84,005 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने संबंधी राजस्व विभाग की जानकारी: रिपोर्ट पढ़ें.
- उत्तर प्रदेश सरकार का एंटी भू-माफिया पोर्टल — शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई की स्थिति देखने के लिए: आधिकारिक पोर्टल.
- Times of India, 6 अक्टूबर 2025 — मिशन शक्ति के दौरान एंटी-रोमियो स्क्वॉड की विशेष जाँच और कार्रवाई: रिपोर्ट पढ़ें.
- NCRB, Crime in India 2024 — नवीनतम प्रकाशित वार्षिक अपराध आँकड़ों का आधिकारिक स्रोत: NCRB वेबसाइट.
- भारत सरकार का Open Government Data Platform — NCRB Crime in India 2024 के राज्यवार अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्या, आरोपपत्र और दोषसिद्धि से संबंधित डेटासेट: डेटा कैटलॉग.
- Economic Times, 30 सितंबर 2025 — NCRB 2023 के आधार पर उत्तर प्रदेश की दर्ज अपराध दर और राष्ट्रीय औसत की तुलना: रिपोर्ट पढ़ें.
- Times of India, 2 अक्टूबर 2025 — NCRB 2023 और दंगों संबंधी उत्तर प्रदेश सरकार के दावों पर रिपोर्ट: रिपोर्ट पढ़ें.
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों, सरकारी बयानों और उपलब्ध आँकड़ों पर आधारित है। जहाँ आँकड़े पुलिस या राज्य सरकार की समीक्षा से लिए गए हैं, वहाँ उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है। दर्ज अपराध, पुलिस कार्रवाई, अदालत में तय मामले और दोषसिद्धि अलग-अलग संकेतक हैं। 2025–2026 के आंशिक आँकड़ों की तुलना पूरे कैलेंडर वर्ष के NCRB आँकड़ों से सीधे नहीं की जानी चाहिए।
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